Intercropping Farming Tips: देश में बहुत से किसान खेती के जरिए बहुत ज्यादा आमदनी नहीं कमा पाते हैं. इसलिए अब अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए किसानों अब खेतों में कुछ नया तरीका आजमाना बेहद जरूरी हो गया है. इसी कड़ी में अरहर और हल्दी को एक साथ उगाना इन दिनों पहली पसंद बनता जा रहा है. अमूमन एक सीजन में सिर्फ एक ही फसल बोने से लागत और नुकसान का डर दोनों ज्यादा रहता है. लेकिन इस तकनीक के साथ आप अपने खेत का पूरा इस्तेमाल कर पाते हैं.
अरहर की फसल जहां ऊपर की तरफ लंबी होती है. वहीं हल्दी जमीन के नीचे आराम से तैयार होती है. जिससे दोनों को बढ़ने के लिए पूरा मौका मिलता है. इस कॉम्बिनेशन से न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधरती है बल्कि मार्केट में डिमांड होने की वजह से एक ही बार की मेहनत में किसानों का प्रॉफिट सीधे डबल हो जाता है. जान लें सही तरीका.
आधी लागत में काम करती है यह तकनीक
इस तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आपका खर्च लगभग आधा हो जाता है. जब आप खेत में अरहर की लाइनें लगाते हैं. तो दो लाइनों के बीच में काफी खाली जगह बच जाती है. इसी जगह का इस्तेमाल हल्दी की बुवाई के लिए किया जाता है. अरहर के पौधों को जो खाद और पानी दिया जाता हैय उसका पूरा फायदा बीच में लगी हल्दी की फसल को भी अपने आप मिल जाता है.
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यानी कि अलग से आपको कोई एक्स्ट्रा मेहनत या खर्च नहीं करना पड़ता है. इसके अलावा अरहर की पत्तियां जब खेत में गिरती हैं. तो वे गलकर नेचुरल खाद का काम करती हैं. जिससे हल्दी का साइज बहुत शानदार बैठता है. इस तरह एक ही बार की पूरी तैयारी में आपकी दो बढ़िया फसलें एक साथ लगकर तैयार हो जाती हैं.
रिस्क हो जाता बहुत कम
खेती-किसानी में मौसम और बाजार के उतार-चढ़ाव का डर हमेशा बना रहता है. लेकिन यह तरीका आपको आपको फसल को सेफ्टी देता है. अरहर एक दलहनी फसल है जो हवा से जरूरी पोषक तत्व लेकर जमीन को उपजाऊ बनाती है. जिससे आपकी दोनों फसलों की क्वालिटी एकदम नंबर वन होती है.
हल्दी कर देती है अरहर की भरपाई
अगर किसी वजह से मार्केट में अरहर के दाम थोड़े कम भी रहे तो हल्दी की फसल अपनी भारी डिमांड के चलते उस कमी को पूरा करके आपको बंपर मुनाफा कमा कर दे देगी. हल्दी को पकने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है. इसलिए जब तक अरहर कटकर बिकने जाती है तब तक हल्दी बड़ी होती रहती है. इस तरीके से किसान भरपूर फायदा ले रहे हैं.
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