Owl Use In Farming:भारतीय गांवों और खेतों में अक्सर रात के सन्नाटे में उल्लू की आवाज सुनाई दे जाती है. भले ही पुराने जमाने के लोग इसे अशुभ मानते रहे हों. लेकिन आज किसान इसे अपना सबसे बड़ा मददगार मानता है. असल में उल्लू को किसानों का वफादार दोस्त कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. यह रात के अंधेरे में खेत की पहरेदारी करता है.
चूहे, टिड्डियां और छोटे-मोटे कीट-पतंगे जो किसानों की महीनों की मेहनत को पल भर में बर्बाद कर देते हैं. उल्लू उनसे खेत का बचाता है आजकल इको-फ्रेंडली खेती और बिना केमिकल वाले अनाज उगाने का ट्रेंड बढ़ रहा है. ऐसे में उल्लू जैसे पक्षी खेतों की सुरक्षा के लिए काफी कारगर साबित हो रहे हैं.
चूहों और हानिकारक कीटों का सफाया करता है
खेतों में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान चूहों से होता है. जो अनाज की जड़ों और बोरियों को कुतरकर किसानों को भारी चपत लगाते हैं. उल्लू इन्हें निपटाता है, उल्लू की आंखें रात के घने अंधेरे में भी बिल्कुल साफ देख सकती हैं और इसके सुनने की क्षमता इतनी गजब की होती है कि यह सूखी पत्तियों के नीचे रेंगने वाले कीड़ों की आहट भी आसानी से पकड़ लेता है.
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उल्लू के पंखों की बनावट ऐसी होती है कि जब यह उड़ता है. तो बिल्कुल भी आवाज नहीं होती. जिस वजह से चूहों को संभलने का मौका ही नहीं मिलता. एक उल्लू सालभर में हजारों चूहों और फसलों को चट कर जाने वाले खतरनाक कीड़ों का शिकार करके खेत को पूरी तरह साफ रखता है.
बिना खर्च के फसलों की सिक्योरिटी
आजकल किसान फसलों को बचाने के लिए महंगे और जहरीले पेस्टिसाइड्स पर अंधाधुंध पैसा खर्च करते हैं. जिससे मिट्टी की क्वालिटी भी खराब होती है. लेकिन उल्लू की मौजूदगी से किसानों को बिना एक भी पैसा खर्च किए एक ऐसा सिक्योरिटी गार्ड मिल जाता है जो पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता.
रात में करता है निगरानी
यह रात के समय एक्टिव होकर खेत के कोने-कोने की निगरानी करता है और गिलहरियों, चूहों और दूसरे छोटे जीवों की आबादी को कंट्रोल में रखता है. कृषि वैज्ञानिक भी अब किसानों को सलाह देते हैं कि वे अपने खेतों के आसपास ऊंचे पेड़ या लकड़ी के स्टैंड लगाएं जिससे उल्लू वहां बैठकर आराम से शिकार कर सकें.
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