Moong Farming Tips: वेस्टर्न यूपी के आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और फिरोजाबाद जैसे जिलों में आलू की खुदाई और गेहूं की कटाई खत्म होने के बाद अब बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की जा रही है. पहले के समय में गेहूं और आलू की फसलों के बाद खेत कुछ समय के लिए खाली छोड़ दिए जाते थे. लेकिन अब किसान इस खाली समय में तीसरी फसल के रूप में मूंग को प्राथमिकता दे रहे हैं.
आगरा संभाग के इस पूरे क्षेत्र में गेहूं की कटाई के तुरंत बाद मूंग की बुवाई शुरू हो जाती है. महज 90 दिनों के भीतर तैयार होने वाली यह जायद फसल कम समय में तैयार हो जाती है. इसे उगाने में पानी की जरूरत बहुत सीमित होती है और बेहद कम लागत में किसानों को अपनी इस फसल से सीधे और अच्छे दाम मिल जाते हैं.
कम समय में मिल रहा अच्छा मुनाफा
इस खेती का सबसे बड़ा फायदा है कम लाग. मार्च के महीने में गेहूं और आलू की खुदाई के तुरंत बाद बोई जाने वाली यह फसल जून की शुरुआत तक कटकर पूरी तरह तैयार हो जाती है. यानी दो मुख्य फसलों के बीच का जो समय खाली जाता था. यह उसका सबसे स्मार्ट इस्तेमाल है.
यह भी पढ़ें: सब्जी बोने से पहले अपने खेत में डाल दें ये बीज, दोगुना हो जाएगा मुनाफा
आगरा और आसपास के इलाकों में इसकी खेती करने वाले बताते हैं कि प्रति हेक्टेयर लागत सिर्फ सात से आठ हजार रुपये के आसपास बैठती है. इस मामूली से खर्चे के बदले किसानों को प्रति हेक्टेयर करीब 12 से 15 क्विंटल तक की शानदार पैदावार बहुत आसानी से मिल जाती है.
खाद-पानी की बचत
मूंग की इस खेती की एक और बड़ी खूबी यह है कि यह खुद एक नेचुरल फर्टिलाइजर की तरह काम करती है. दलहनी फसल होने की वजह से इसकी जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने का काम करती हैं. जिससे खेत की उपजाऊ क्षमता अपने आप सुधर जाती है और अगली फसल में खाद का पैसा बचता है. किसान इसमें महंगे केमिकल्स की जगह जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं. जिससे फसल की क्वालिटी एकदम नंबर वन आ रही है.
मंडी में बंपर डिमांड
बाजार की बात करें तो मंडी में मूंग के दाम हमेशा बेहद मजबूत रहते हैं और यह छह से सात हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर हाथों-हाथ बिक जाती है. कम लागत में कई गुना ज्यादा मुनाफा देने की वजह से ही यह फसल इस पूरे बेल्ट में काफी मशहूर हो रही है.
यह भी पढ़ें: बाढ़ या आग से पशुओं का नुकसान? टेंशन छोड़िए सरकार की यह धांसू स्कीम सीधे खाते में भेजेगी पैसा


