MP Wheat : मध्यप्रदेश अब देश और दुनिया में गेहूं प्रदेश के नाम से मशहूर हो गया है. पिछले कुछ वर्षों में यहां गेहूं की मात्रा और क्वालिटी दोनों में बहुत तरक्की हुई है. भारत के कुल गेहूं प्रोडक्शन में मध्यप्रदेश का हिस्सा लगभग 18 प्रतिशत है. खास बात यह है कि प्रदेश का गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत फेमस हो गया है और खाड़ी देशों सहित कई देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मध्यप्रदेश के गेहूं की खासियत क्या होती है और इसकी खेती कैसे करें.
मध्यप्रदेश का गेहूं और अंतरराष्ट्रीय बाजार
मध्यप्रदेश का गेहूं भारत से विदेशों को निर्यात होने वाले गेहूं में लगभग 35-40 प्रतिशत का योगदान देता है. प्राकृतिक मिठास और बड़े दाने की वजह से मध्यप्रदेश का गेहूं जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई और साउथ अफ्रीका सहित खाड़ी देशों में भी पसंद किया जाता है. इसे ब्रेड, बिस्किट और पास्ता बनाने में काफी अच्छा माना जाता है. हाई प्रोटीन और पोषक तत्वों की वजह से यह गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम कीमत पर बिकता है.
मध्यप्रदेश के गेहूं का प्रोडक्शन और क्वालिटी कैसी होती है
भारत सरकार के गेहूं अनुसंधान निदेशालय के अनुसार, मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले सामान्य गेहूं में औसतन 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम आयरन और 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है. इसके अलावा, कठिया प्रजाति के गेहूं में प्रोटीन, आयरन, मैंगनीज और जिंक की मात्रा ज्यादा होती है. इन गुणों की वजह से मध्यप्रदेश के गेहूं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च कीमत मिलती है. यह विशेष रूप से उन देशों में पसंद किया जाता है जहां भारतीय गेहूं की मांग होती है, जैसे ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, मलेशिया और इंडोनेशिया.
मध्यप्रदेश के गेहूं की खासियत क्या होती है
मध्यप्रदेश का गेहूं अपनी प्राकृतिक मिठास और बड़े दाने के कारण खास माना जाता है और इसे ब्रेड, बिस्किट, पास्ता और रोटियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसमें प्रोटीन और पोषक तत्व ज्यादा पाए जाते हैं, और इसका आटा नरम होता है, जिससे रोटियां लंबे समय तक ताजी रहती हैं, विशेष रूप से Sehore और Vidisha क्षेत्रों में उगाए जाने के कारण इसे MP Sharbati Wheat के नाम से जाना जाता है. शरबती गेहूं टेस्टी होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें मौजूद मैग्नीशियम शरीर में इंसुलिन और ग्लूकोज के संतुलन में मदद करता है, जिससे यह टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए भी उपयुक्त ऑप्शन बनता है.
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मध्यप्रदेश के गेहूं की खेती कैसे करें
मध्यप्रदेश में गेहूं की खेती करने के लिए सबसे पहले अच्छे और हाई क्वालिटी वाले बीज का चयन करना जरूरी है. किसान अब वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें सही बुआई समय, मिट्टी की जांच, उचित उर्वरक और सिंचाई तकनीक अपनाई जाती है. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) किसानों को प्रशिक्षण देते हैं कि किस किस्म का गेहूं उनके क्षेत्र और जलवायु के अनुसार सबसे अच्छा होगा. खेत में नियमित नमी और पानी का संतुलन बनाए रखना, खरपतवार नियंत्रण और कीट-मुक्त रखने की तकनीक अपनाना भी जरूरी है. इसके अलावा, मौसम और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए सिंचाई योग्य पानी का सही उपयोग और सही समय पर कटाई करना भविष्य में हाई प्रोडक्शन और क्वालिटी तय करता है.
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