Agrivoltaics Technique: भारतीय कृषि सेक्टर में एक क्रांतिकारी तकनीक तेजी से पैर पसार रही है जिसका नाम है एग्रीवोल्टिक्स. यह मॉडर्न सिस्टम किसानों के लिए डबल कमाई का एक ऐसा जरिया बनकर उभरा है जहां एक ही जमीन पर फसल भी लहलहाएगी और सोलर पैनल से बिजली का उत्पादन भी होगा. अब तक माना जाता था कि सोलर पैनल लगाने से खेती की जमीन बेकार हो जाती है.
लेकिन इस स्मार्ट तकनीक ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. इसमें जमीन से कुछ ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं जिससे नीचे फसलों के लिए पर्याप्त जगह और सही मात्रा में धूप-छांव बनी रहती है. यह कॉम्बिनेशन न सिर्फ किसानों को बिजली बेचने का एक एक्स्ट्रा बिजनेस देता है बल्कि फसलों की पैदावार को भी कई गुना बढ़ा देता है. चलिए आपको बताते हैं इसका एकदम सही तरीका.
एक ही जमीन पर डबल फायदा
एग्रीवोल्टिक सिस्टम जमीन के एक-एक टुकड़े का पूरा इस्तेमाल करने में मदद करता है. सोलर पैनल के नीचे खाली बची जमीन पर ऐसी फसलें उगाई जाती हैं जिन्हें थोड़ी कम या छनकर आने वाली धूप की जरूरत होती है. जैसे पत्तेदार सब्जियां, औषधीय पौधे, अदरक और हल्दी. ये पैनल कड़कड़ाती धूप और हीटवेव से फसलों की रक्षा करते हैं.
जिससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है और सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत पड़ती है. दूसरी तरफ, फसलों और मिट्टी से निकलने वाली ठंडक के कारण सोलर पैनल का तापमान भी मेंटेन रहता है जिससे उनकी बिजली बनाने की क्षमता काफी बढ़ जाती है. यानी फसल से मुनाफा और पैनल से भरपूर बिजली दोनों काम एक साथ चलते हैं.
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ग्रिड को बिजली बेचकर हर महीने इनकम
इस कमाल की तकनीक को अपनाने के बाद किसानों की किस्मत सिर्फ खेती के भरोसे नहीं रहती. बल्कि बिजली से भी कमाई होती है. सोलर पैनल से बनने वाली बिजली का इस्तेमाल किसान अपने खेतों के पंप चलाने और घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं.जिससे उनका बिजली का बिल पूरी तरह जीरो हो जाता है.
इसके बाद जो एक्स्ट्रा बिजली बचती है. उसे सीधे सरकारी या प्राइवेट पावर ग्रिड को बेचा जा सकता है. इससे किसानों को हर महीने एक बंधी-बंधाई और मोटी रकम मिलने लगती है जो खराब मौसम या मंदी के समय भी उनके बैंक अकाउंट में आती रहती है. सरकार भी इस क्लीन और ग्रीन एनर्जी मॉडल को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की सब्सिडी और लोन सुविधाएं दे रही है.
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