Commercial Horticulture Development Scheme: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी आजकल एक बड़ी सब्सिडी को लेकर चर्चा में हैं. उन पर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट योजना के तहत लगभग 99 लाख रुपये की सब्सिडी लेने के आरोप लगे हैं. जिस पर उन्होंने सफाई दी है कि सब कुछ नियमों के तहत हुआ है.
आपको बता दें इस सरकारी स्कीम को बड़े पैमाने पर आधुनिक और व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है. जिससे किसान अपनी इनकम को कई गुना बढ़ा सकते हैं. जान लीजिए क्या है पूरी स्कीम और कैसे आम किसान ले सकते हैं इसका फायदा.
क्या है इस स्कीम को लेकर मंत्री जी पर आरोप?
यह पूरा मामला राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की व्यावसायिक बागवानी विकास योजना से जुड़ा हुआ है. केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने अपने परिवार के नाम पर इस स्कीम के तहत करीब 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी ली है.
इस पर विवाद खड़ा होने के बाद मंत्री जी ने खुद का बचाव करते हुए साफ कहा कि उन्होंने किसी नियम को नहीं तोड़ा है और बकायदा बैंक से लोन लेकर पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत इस प्रोजेक्ट में निवेश किया है. यह योजना असल में खीरा, टमाटर और विदेशी फूलों जैसी हाई-वैल्यू फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस लगाने में मदद करती है.
किसानों को कितनी मिलेगी सब्सिडी?
अगर आप भी इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं. तो सरकार आपके प्रोजेक्ट की कुल लागत का 50% तक सब्सिडी के रूप में वापस कर देती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक परिवार के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा पूरे 1 करोड़ रुपये तय की गई है.
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क्या हैं इसकी शर्तें?
इस योजना का फायदा उठाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी हैं. जैसे आपके पास खुद की या लीज पर ली गई खेती योग्य जमीन होनी चाहिए. इसके अलावा यह कोई मुफ्त का फंड नहीं है. बल्कि आपके प्रोजेक्ट में बैंक लोन और आपका खुद का निवेश शामिल होना बेहद जरूरी है.
कैसे करें इसके लिए आवेदन?
इस योजना के जरिए सब्सिडी पाने के लिए किसानों को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है. चूंकि यह एक बड़े लेवल का कमर्शियल प्रोजेक्ट होता है. इसलिए अप्लाई करने से पहले आपको एक मजबूत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवानी पड़ती है.
फॉर्म जमा होने के बाद सरकारी अधिकारी आपके खेत पर आकर तकनीकी मूल्यांकन और जॉइंट इंस्पेक्शन करते हैं. एक बार जब आपके प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल जाती है. तो बैंक लोन और सब्सिडी की कागजी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ जाती है और पैसा सीधे आपके खाते से जुड़े प्रोजेक्ट में आ जाता है.
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