Vetiver Farming Tips: जुलाई का महीना आते ही किसान खरीफ की फसलों की तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन ज्यादातर पारंपरिक फसलों के साथ दो बड़ी दिक्कतें हमेशा रहती हैं पहली बहुत ज्यादा पानी की जरूरत और दूसरी आवारा पशुओं का आतंक. अगर आप भी इन दोनों समस्याओं से परेशान हैं और किसी ऐसी खेती की तलाश में हैं जो बिना किसी रिस्क के आपको तगड़ा मुनाफा दे सके.
तो जुलाई का महीना आपके लिए सबसे बेस्ट है. इस महीने एक ऐसी औषधीय फसल की बुआई की जाती है, जिसे न तो छुट्टा जानवर खाते हैं और न ही इसे बहुत ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है. बस एक बार की सही मेहनत और करीब डेढ़ साल यानी 18 महीने का सब्र, इसके बाद यह फसल आपको सीधे बंपर कमाई का रास्ता दिखाएगी.
खस की खेती है किसानों के लिए मुनाफे का सौदा
हम बात कर रहे हैं खसकी खेती की जिसकी मांग बाजार में हमेशा बहुत ऊंची रहती है. जुलाई का महीना इसकी रोपाई के लिए सबसे शानदार माना जाता है क्योंकि इस समय मानसून की शुरुआती बारिश पौधों को अच्छी तरह सेट होने में मदद करती है. खस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पौधों में एक खास खुशबू होती है.
जिसकी वजह से नीलगाय, गाय या कोई भी आवारा पशु इसे छूते तक नहीं हैं. इसके अलावा यह फसल हर तरह की मिट्टी में आसानी से सरवाइव कर जाती है. चाहे वह बंजर जमीन हो या जलभराव वाला इलाका. एक बार पौधा बड़ा हो जाए तो इसे नाममात्र के पानी की जरूरत होती है.
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डेढ़ साल में कैसे चमकेगी किस्मत
खस की असली कीमत उसकी जड़ों में छिपी होती है, जिससे बेहद कीमती खस का तेल निकाला जाता है. रोपाई के करीब 15 से 18 महीने बाद इसकी जड़ें पूरी तरह तैयार हो जाती हैं, जिन्हें खोदकर निकाल लिया जाता है. इस तेल का इस्तेमाल बड़े-बड़े ब्रांड्स महंगे परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स, साबुन और कूलिंग सिरप बनाने में करते हैं.
बाजार में खस के तेल की कीमत हजारों रुपये प्रति लीटर होती है. लागत के नाम पर इसमें सिर्फ शुरुआती पौधे खरीदने और रोपाई का थोड़ा सा खर्च आता है, लेकिन डेढ़ साल बाद जब इसकी हार्वेस्टिंग होती है, तो यह पारंपरिक फसलों के मुकाबले कई गुना ज्यादा शुद्ध मुनाफा सीधे किसानों की जेब में डालती है.
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