टाटा मोटर्स के एकीकृत ग्राम विकास कार्यक्रम से चंद्रकांत बने ‘लखपति किसान’
भारत में कृषि आज भी रोज़गार और जीवनयापन का एक प्रमुख आधार बनी हुई है, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में। महाराष्ट्र के पालघर ज़िले के जव्हार क्षेत्र के एक आदिवासी गांव के किसान चंद्रकांत सोन्या आंधेर भी लंबे समय तक इसी कठोर वास्तविकता से जूझते रहे। केवल मैट्रिक तक की शिक्षा, बारिश पर निर्भर दो एकड़ कृषि भूमि और लगातार बनी रहने वाली पानी की कमी के कारण उनकी आमदनी बेहद सीमित थी। भूमि का एक बड़ा हिस्सा अनुपजाऊ पड़ा रहता था और मजबूरी में उन्हें रोज़गार की तलाश में पास के शहरों में पलायन करना पड़ता था। इसका सीधा असर परिवार की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता पर पड़ता था।

ऐसे समय में टाटा मोटर्स के एकीकृत ग्राम विकास कार्यक्रम (इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम – IVDP) ने चंद्रकांत के जीवन में बदलाव की नई उम्मीद जगाई। यह कार्यक्रम स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए एक बहु-स्तरीय और टिकाऊ विकास ढांचे पर आधारित है, जिसमें सरकारी योजनाओं के प्रभावी समन्वय को केंद्र में रखा गया है।
टाटा मोटर्स ने विभिन्न सरकारी योजनाओं को जोड़ते हुए चंद्रकांत की आजीविका को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके खेत में पानी संचयन के लिए फार्म पॉन्ड का निर्माण किया गया, सीमित जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई और ईंधन खर्च कम करने के उद्देश्य से बायोगैस यूनिट लगाई गई। इसके साथ ही आय बढ़ाने और जोखिम को कम करने के लिए एग्रो-फॉरेस्ट्री, मछली पालन, सोलर पैनल की स्थापना, बांस की खेती और उच्च मूल्य वाली फसलों की नर्सरी जैसी विविध गतिविधियों को अपनाने में भी सहायता की गई।
इन प्रयासों के परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे। सुनिश्चित सिंचाई व्यवस्था, बेहतर कृषि तकनीकों और आय के नए स्रोतों के चलते चंद्रकांत की खेती की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उनकी वार्षिक आमदनी दोगुने से भी अधिक हो गई। आज वे परिवार की आवश्यकताओं को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं, अतिरिक्त उपज बेच रहे हैं, बच्चों की शिक्षा में निवेश कर रहे हैं और परिवार के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कर सके हैं। उन्होंने अपनी भूमि पर एक अतिरिक्त घर का निर्माण भी किया है, जिससे उनका सफर ‘लखपति किसान’ बनने तक पहुंच सका।
अपने अनुभव साझा करते हुए चंद्रकांत कहते हैं, “पानी की कमी के कारण मेरी ज़मीन का बड़ा हिस्सा बेकार पड़ा रहता था और मुझे हर साल कई महीनों तक परिवार से दूर रहकर काम करना पड़ता था। टाटा मोटर्स ने हमें उम्मीद दी और आगे बढ़ने का एक व्यावहारिक रास्ता दिखाया। आज मुझे पलायन नहीं करना पड़ता और मेरे परिवार की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है।”
टाटा मोटर्स के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व – सीएसआर) प्रमुख विनोद कुलकर्णी ने कहा, “चंद्रकांत की यात्रा यह दर्शाती है कि समुदाय-केंद्रित ग्रामीण विकास किस प्रकार लोगों को आत्मनिर्भर बना सकता है। सरकारी योजनाओं के सही उपयोग और उनके प्रभावी समन्वय के माध्यम से ऐसे मॉडल को बड़े स्तर पर दोहराया और विस्तारित किया जा सकता है।”
चंद्रकांत की यह प्रेरक सफलता आसपास के अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल बन गई है। इससे वे नई तकनीकों को अपनाने, अपनी आजीविका में विविधता लाने और स्थायी समाधान खोजने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, जिससे क्षेत्र में पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल रही है।


