नीति आयोग की नई रिपोर्ट ने भी युवाओं के सामने मौजूद इस रोजगार संकट को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट हासिल कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें अपनी पढ़ाई और स्किल के मुताबिक नौकरी मिलने में परेशानी हो रही है
भारत में डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट हासिल करने वाले युवाओं की कमी नहीं है। इस समय करीब 4.34 करोड़ छात्र हायर एजुकेशन यानी ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डिग्री की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, डिप्लोमा और आईटीआई करने वाले छात्रों की संख्या 44 लाख से ज्यादा है। इसके बावजूद पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़ी संख्या में युवाओं को उनकी योग्यता के मुताबिक नौकरी नहीं मिल रही है। पिछले साल सिर्फ 8.25 प्रतिशत ग्रेजुएट्स ही अपनी योग्यता के अनुसार नौकरी हासिल कर पाए।
1 साल में सिर्फ 8.25% को मिली जॉब
वहीं, नीति आयोग की नई रिपोर्ट ने भी युवाओं के सामने मौजूद इस रोजगार संकट को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट हासिल कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें अपनी पढ़ाई और स्किल के मुताबिक नौकरी मिलने में परेशानी हो रही है। इससे साफ है कि शिक्षा और नौकरी की जरूरतों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। नीति आयोग की हाल ही में जारी रिपोर्ट ‘ Reimgining Skilling for Viksit Bharat @2047’ में भारत की उच्च और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था और नौकरी के बाजार की बदलती जरूरतों के बीच बढ़ते अंतर को बताया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, भारत में सिर्फ 8.25 प्रतिशत ग्रेजुएट ही अपनी पढ़ाई और योग्यता के मुताबिक काम कर रहे हैं। पोर्ट में पढ़े-लिखे लोगों में बेरोजगारी की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। इसके मुताबिक, देश में सभी ग्रेजुएट्स में से 13 प्रतिशत बेरोजगार हैं। वहीं, ग्रेजुएट महिलाओं में बेरोजगारी की दर 20.4 प्रतिशत है। इसके मुकाबले देश की कुल बेरोजगारी दर सिर्फ 3.2 प्रतिशत है।
BA, BSc और BCom में 2 करोड़ से ज्यादा छात्र
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में बड़ी संख्या में छात्र ऐसी सामान्य डिग्री कर रहे हैं, जिनसे सीधे नौकरी मिलने की संभावना कम होती है। देश के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में करीब 3.4 करोड़ छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें से अकेले 1.13 करोड़ छात्र BA कर रहे हैं। वहीं, BA, BSc और BCom तीनों को मिलाकर इन पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 2 करोड़ से ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई छात्र इन डिग्रियों को मुख्य रूप से सरकारी नौकरी के लिए जरूरी योग्यता हासिल करने के लिए करते हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच सिर्फ 55 हजार सरकारी पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन मिले।
नीति आयोग का कहना है कि डिग्री कॉलेजों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) और पॉलिटेक्निक में यह असंतुलन दिखाता है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। इसके लिए शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच ज्यादा सहयोग बढ़ाना होगा। साथ ही, सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी (PPP मॉडल) के जरिए पढ़ाई को नौकरी और इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़ने पर भी जोर देना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी साझेदारियां पाठ्यक्रम को समय के हिसाब से बदलने, पढ़ाई को सीधे नौकरियों से जोड़ने और यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं कि छात्रों को मौजूदा समय की जरूरत के मुताबिक कौशल मिल सके। साथ ही, उनकी पढ़ाई का सीधा फायदा रोजगार पाने में हो।
नीति आयोग ने नौकरी से जुड़े डिग्री प्रोग्राम की जरूरत बताई
नीति आयोग ने उच्च और तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रम और पढ़ाने के तरीके में बड़े बदलाव की जरूरत बताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब सामान्य डिग्री प्रोग्राम के बजाय ऐसे खास कोर्स पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, जो सीधे नौकरी और इंडस्ट्री की जरूरतों से जुड़े हों। खास तौर पर BA, BSc और BCom जैसी ज्यादा छात्रों वाली डिग्री में इस तरह के बदलाव किए जाने चाहिए।
रिपोर्ट में BA हॉस्पिटैलिटी, BCom एनालिटिक्स और BSc एप्लाइड टेक्नोलॉजी जैसे नए और नौकरी से जुड़े विषय शुरू करने की सिफारिश की गई है। इन कोर्स का मकसद छात्रों को ऐसी पढ़ाई और कौशल देना है, जिनकी मांग मौजूदा समय में इंडस्ट्री में है।
रिपोर्ट में काम के साथ पढ़ाई और अप्रेंटिसशिप से जुड़े डिग्री प्रोग्राम (AEDP) को बड़े स्तर पर बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, AEDP जैसे कार्यक्रम शुरू तो किए गए हैं, लेकिन देश की बड़ी उच्च शिक्षा व्यवस्था को देखते हुए अभी बहुत कम छात्र इनका फायदा उठा रहे हैं। इसकी वजह से छात्रों को पढ़ाई पूरी करने से पहले काम का अच्छा अनुभव हासिल करने के मौके कम मिलते हैं।
रिपोर्ट में पढ़ाई के ज्यादा लचीले तरीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है। इनमें मॉड्यूल के हिसाब से पढ़ाई, पार्ट-टाइम कोर्स, हाइब्रिड पढ़ाई और कमाई के साथ पढ़ाई जैसे विकल्प शामिल हैं। ऐसे तरीकों से छात्र अपनी पढ़ाई के साथ नौकरी या काम भी कर सकेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बदलावों के लिए शिक्षा संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच ज्यादा मजबूत और व्यवस्थित सहयोग जरूरी है। फिलहाल ज्यादातर सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों में इंडस्ट्री की भागीदारी बहुत कम है।


