
डेयरी फार्मर्स की पहली पसंद मुर्राह भैंस ही होती है. इसे दूध की मशीन भी कहा जाता है, क्योंकि इसके दूध में फैट काफी अच्छा होता है. यह एक लेक्टेशन पीरियड में आसानी से 2000 से 2500 लीटर तक दूध दे देती है. अगर आपको ज्यादा फैट और बढ़िया दूध उत्पादन चाहिए तो मुर्राह जरूर रखें.

गुजरात के गिर जंगलों से आने वाली जाफराबादी भैंस अपने भारी-भरकम शरीर और शानदार दूध क्षमता के लिए जानी जाती है. यह रोज का 15 से 20 लीटर दूध आराम से दे देती है. इसका दूध काफी गाढ़ा होता है जिससे घी और मावा बनाने वाले डेयरी मालिकों को बहुत बढ़िया मुनाफा मिलता है.

पंजाब और सतलुज नदी के आसपास के इलाकों में पाई जाने वाली नीली रावी भैंस भी दूध के मामले में किसी से कम नहीं है. इसकी पहचान चेहरे और पैरों पर सफेद निशानों से होती है. यह भैंस रोजाना 12 से 18 लीटर तक दूध देने की ताकत रखती है और इसकी देखभाल करना भी काफी आसान है.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के इलाकों में पाई जाने वाली भदावरी भैंस भले ही साइज में थोड़ी छोटी हो लेकिन इसके दूध का फैट परसेंट सबसे ज्यादा 8% से 13% होता है. अगर आपका फोकस दूध बेचने के बजाय घी, मलाई या खोया बनाकर बेचने पर है. तो यह नस्ल आपके लिए बेस्ट रहेगी.

गुजरात की सुरती नस्ल की भैंस मीडियम साइज की होती है और इसे पालने में खर्चा भी बहुत कम आता है. यह कम चारा खाकर भी रोजाना 10 से 12 लीटर तक बढ़िया दूध दे देती है. छोटे पैमाने पर डेयरी बिजनेस शुरू करने वाले या कम बजट वाले किसानों के लिए यह नस्ल एकदम परफेक्ट ऑप्शन है.

डेयरी फार्म शुरू करते वक्त सिर्फ एक ही नस्ल पर निर्भर रहने के बजाय 2-3 अलग नस्लों का कॉम्बिनेशन रखें. इससे आपको ज्यादा दूध और ज्यादा फैट दोनों का बैलेंस मिल जाएगा. सही खान-पान, साफ-सफाई और टाइम पर देखभाल करेंगे तो आपका डेयरी फार्म बिजनेस दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की करेगा.
Published at : 22 Jul 2026 12:53 PM (IST)


