Agriculture News: आजकल भारत में सिर्फ ड्रैगन फ्रूट ही नहीं, बल्कि कई दूसरे विदेशी फलों की भी खूब मांग बढ़ रही है. पहले ये फल सिर्फ बड़े शहरों में मिलते थे, लेकिन अब छोटे शहरों में भी लोग इन्हें खरीद रहे हैं. होटल, जूस की दुकान और बड़े स्टोर में भी इन फलों की अच्छी बिक्री हो रही है. ऐसे में किसान अगर इन फलों की खेती करें, तो अच्छी कमाई कर सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे कुछ विदेशी फलों के बारे में, जिनकी खेती भारत में भी हो रही है.
ड्रैगन फ्रूट की खेती
ड्रैगन फ्रूट की खेती अब भारत के कई राज्यों में हो रही है. इस पौधे को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. गर्म मौसम में यह अच्छी तरह बढ़ता है. पौधे को सीधा रखने के लिए खंभा लगाया जाता है. एक बार पौधा बड़ा हो जाए, तो कई साल तक फल देता रहता है.
एवोकाडो की खेती
एवोकाडो को बटर फ्रूट भी कहा जाता है. यह फल खाने में स्वादिष्ट होता है. लोग इसे सेहत के लिए भी अच्छा मानते हैं. इसका इस्तेमाल सलाद, सैंडविच और दूसरी खाने की चीजों में किया जाता है. इसकी खेती ऐसी जमीन में अच्छी होती है, जहां बारिश या सिंचाई का पानी न रुके. भारत के कुछ किसान इसकी खेती करके अच्छी कमाई कर रहे हैं.
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कीवी की खेती
कीवी एक ऐसा फल है, जिसमें विटामिन-सी भरपूर होता है. यह ठंडे मौसम में अच्छी तरह उगता है. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में इसकी खेती ज्यादा होती है. अगर मौसम सही हो, तो इस पेड़ पर अच्छे फल आते हैं. इससे किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.
ब्लूबेरी की खेती
ब्लूबेरी महंगे फलों में गिनी जाती है. इसका इस्तेमाल केक, जैम, जूस और दूसरी खाने की चीजों में किया जाता है. यह ठंडे मौसम में अच्छी तरह उगती है. भारत में अभी इसकी खेती बहुत कम हो रही है. लेकिन धीरे-धीरे कई किसान इसे उगाना शुरू कर रहे हैं.
पैशन फ्रूट की खेती
पैशन फ्रूट का स्वाद खट्टा-मीठा होता है. इसका जूस लोगों को काफी पसंद आता है. यह गर्म और नमी वाले मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है. केरल, कर्नाटक, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में इसकी खेती की जाती है. बाजार में इस फल की अच्छी मांग रहती है. इसलिए इससे अच्छी कमाई की जा सकती है.
खेती शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप विदेशी फलों की खेती करना चाहते हैं, तो पहले यह पता कर लें कि आपके इलाके का मौसम और जमीन इस खेती के लिए सही है या नहीं. पौधे हमेशा भरोसे वाली नर्सरी से ही खरीदें. खेती शुरू करने से पहले ऐसे किसान से बात करें, जो पहले से इस फल की खेती कर रहा हो. शुरुआत में कम जमीन पर खेती करें. जब अच्छी जानकारी और अनुभव हो जाए, तब धीरे-धीरे ज्यादा जमीन पर खेती शुरू करें.
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