उन्हें महसूस हुआ कि स्कूलों में बच्चों को प्राकृतिक आपदाओं, खासकर हरिकेन जैसी परिस्थितियों से निपटने की पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। इसी कमी को दूर करने के लिए 16 साल की एलिस ने ‘स्टॉर्म स्मार्ट (Storm Smart)’ नाम का एक छात्र-नेतृत्व वाला कार्यक्रम शुरू किया।
साल 2017 की बात है जब हरिकेन इरमा (Hurricane Irma) ने दक्षिण फ्लोरिडा में तबाही मचाई थी, तब एलिस रॉरेल महज एक छोटी बच्ची थीं। तबाही से चारों भयानक मंजर था। चारों ओर गिरे हुए पेड़, बुरी तरह क्षतिग्रस्त घर और मोहल्ले एलिस के मन पर गहरी छाप छोड़ दी। समय बीतने के साथ यही भयावह अनुभव ने एलिस को एक नई सोच दी। उन्हें महसूस हुआ कि स्कूलों में बच्चों को प्राकृतिक आपदाओं, खासकर हरिकेन जैसी परिस्थितियों से निपटने की पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। इसी कमी को दूर करने के लिए 16 साल की एलिस ने ‘स्टॉर्म स्मार्ट (Storm Smart)’ नाम का एक छात्र-नेतृत्व वाला कार्यक्रम शुरू किया।
‘स्टॉर्म स्मार्ट’ प्रोग्राम का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को यह सिखाना है कि तूफान आने से पहले क्या तैयारियां करनी चाहिए, तूफान के दौरान खुद को सुरक्षित कैसे रखना चाहिए और उसके गुजर जाने के बाद किन सावधानियों का पालन करना चाहिए। एलिस का मानना है कि सही समय पर मिली जानकारी और तैयारी कई लोगों की जान बचा सकती है।
अपनी मुश्किलों से सीख लेकर उन्होंने सिर्फ खुद तक सीमित रहने के बजाय ऐसा अभियान शुरू किया, जो आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सके। उनकी यह पहल इस बात का उदाहरण है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन सोच और बदलाव लाने का जज्बा बड़ा होना चाहिए।
‘स्टॉर्म स्मार्ट’ की शुरुआत एलिस ने अपने गर्ल स्काउट गोल्ड अवॉर्ड प्रोजेक्ट के रूप में की थी। लेकिन आज यह पहल एक बड़े अभियान का रूप ले चुकी है। अब तक इस कार्यक्रम के जरिए करीब 500 छात्रों को हरिकेन से बचाव और आपदा के समय सही कदम उठाने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। एलिस का लक्ष्य इसे दक्षिण फ्लोरिडा के और अधिक स्कूलों तक पहुंचाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सुरक्षित रहना सीख सकें।
बचपन के डर को बनाया बच्चों के लिए सीख
बता दें कि एलिस रॉरेल अमेरिका के उन इलाकों में पली-बढ़ीं हैं, जहां तूफान अक्सर आते हैं। उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि इतने बड़े खतरे के बावजूद स्कूलों में बच्चों को हरिकेन से बचाव और आपदा की तैयारी के बारे में लगभग कोई औपचारिक शिक्षा नहीं दी जाती। टाइम्स ऑफ इंडिया मं छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एलिस बताती है कि दक्षिण फ्लोरिडा में तूफान लोगों की जिंदगी का आम हिस्सा हैं, लेकिन स्कूल बच्चों को यह नहीं सिखाते कि तूफान आने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए और आपात स्थिति में खुद को सुरक्षित कैसे रखना है। यही सोच आगे चलकर ‘स्टॉर्म स्मार्ट’ कार्यक्रम की नींव बनी।
इस कार्यक्रम के तहत स्कूलों में प्रेजेंटेशन दिए जाते हैं, बच्चों को प्रिंटेड लर्निंग मैटेरियल उपलब्ध कराया जाता है, ऑनलाइन संसाधन और सोशल मीडिया के जरिए भी जागरूक किया जाता है। इसमें छात्रों को इमरजेंसी किट तैयार करना, हरिकेन के दौरान सुरक्षित रहने के तरीके और तूफान के बाद आने वाले खतरों, जैसे पानी से भरी सड़कों और टूटकर गिरी बिजली की तारों से बचने के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। यही सोच आगे चलकर ‘स्टॉर्म स्मार्ट’ कार्यक्रम की नींव बनी।
इस कार्यक्रम के तहत स्कूलों में प्रेजेंटेशन दिए जाते हैं, बच्चों को प्रिंटेड लर्निंग मैटेरियल उपलब्ध कराया जाता है, ऑनलाइन संसाधन और सोशल मीडिया के जरिए भी जागरूक किया जाता है। इसमें छात्रों को इमरजेंसी किट तैयार करना, हरिकेन के दौरान सुरक्षित रहने के तरीके और तूफान के बाद आने वाले खतरों-जैसे पानी से भरी सड़कों और टूटकर गिरी बिजली की तारों से बचने के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है।
छात्र ही बने दूसरे छात्रों के शिक्षक
‘स्टॉर्म स्मार्ट’ की सबसे खास बात इसका ‘स्टूडेंट-टू-स्टूडेंट’ (Peer-to-Peer) मॉडल है। इसमें केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि छात्र भी अपने सहपाठियों को हरिकेन से बचाव और आपदा के समय सुरक्षित रहने की जानकारी देते हैं। इस पहल से एक ओर जहां बच्चों में आपदा से निपटने की जागरूकता बढ़ती है, वहीं दूसरी ओर उनके कम्युनिकेशन, आत्मविश्वास और लीडरशिप स्किल्स भी विकसित होते हैं।
कार्यक्रम का तीसरा लर्निंग मॉड्यूल खास तौर पर इस बात पर केंद्रित है कि हरिकेन के दौरान और उसके तुरंत बाद क्या करना चाहिए। एलिस का मानना है कि ऐसी व्यावहारिक जानकारी आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने और नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। ‘स्टॉर्म स्मार्ट’ से जुड़ी अध्ययन सामग्री और अन्य संसाधन कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।


