Ridge Gourd Cultivation Tips: मानसून के मौसम में तोरई की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. लेकिन तोरई जैसी बेल वाली फसलों के साथ अक्सर एक बड़ी समस्या यह आती है कि पौधे में पत्तियां और फूल तो खूब दिखते हैं. लेकिन फल बहुत ही कम लगते हैं. कई किसान इसकी कटिंग की सही तकनीक नहीं अपनाते. यही वजह है कि बेल तो लंबी हो जाती है लेकिन फल कम लगते हैं.
ऐसे में इस समस्या के लिए कारगर हल है 3G कटिंग. इस तकनीक को अब किसान खूब अपना रहे हैं. इस तरीके में समय पर बेल की कटिंग कर पौधे की बढ़वार को सही दिशा दी जाती है. इससे पौधे में ज्यादा शाखाएं निकलती हैं और हर शाखा पर फल आने के चांस बढ़ जाते है. कम लागत में ज्यादा उत्पादन लेने के लिए यह तरीका काफी इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या है 3G कटिंग तकनीक?
3G कटिंग का मतलब बेल की बढ़वार के अलग-अलग चरणों में तय समय पर कटिंग करना है. जब मुख्य बेल कुछ पत्तियों तक पहुंच जाती है. तब उसका ऊपरी हिस्सा हल्का काट दिया जाता है. इसके बाद पौधे से नई शाखाएं निकलती हैं. फिर इन्हीं शाखाओं की भी जरूरत के हिसाब से कटिंग की जाती है.
जिससे सेकेंडरी और थर्ड लेवल की शाखाएं विकसित होती हैं. यही वजह है कि इसे 3G कटिंग कहा जाता है. इस प्रक्रिया से पौधे की ऊर्जा सिर्फ बेल बढ़ाने में खर्च नहीं होती, बल्कि ज्यादा फूल और फल बनने पर लगती है. इससे एक ही बेल पर पहले के मुकाबले ज्यादा तोरई लगती है और उत्पादन में साफ बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
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ज्यादा उत्पादन के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान
तोरई की खेती में सिर्फ 3G कटिंग अपनाना ही काफी नहीं है. अच्छी पैदावार के लिए खेत में पानी निकासी की सही व्यवस्था होना भी जरूरी है. मानसून में अगर खेत में पानी भर जाता है. तो जड़ें खराब हो सकती हैं. इसलिए समय-समय पर जैविक खाद देना जरूरी है. जिससे नई शाखाओं को पूरा पोषण मिलता रहे.
बेल को सहारा देने के लिए मचान का इस्तेमाल करने से फल सीधे और अच्छी क्वालिटी के आते हैं. इसके साथ ही कीट और फफूंद दिखते ही उनका तुरंत खात्मा भी कर देना चाहिए. अगर किसान कटिंग के साथ सिंचाई, खाद और पौधों की देखभाल पर भी ध्यान दें तो एक ही बेल से लंबे समय तक ज्यादा फल हासिल किए जा सकते हैं.
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