Delhi-Dehradun Expressway For Farmers: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं. बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों के लिए समृद्धि का नया गलियारा साबित होने वाला है. अब तक जो किसान अपनी फसल को बड़ी मंडियों तक पहुंचाने के लिए घंटों जाम और खराब सड़कों से जूझते थे. उनके लिए अब दिल्ली का बाजार चंद घंटों की दूरी पर होगा. सफर का समय घटने से फल, फूल और सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों की ताजगी बनी रहेगी.
जिससे किसानों को बाजार में दोगुना दाम मिल सकेगा. यह प्रोजेक्ट केवल सफर को छोटा नहीं कर रहा. बल्कि ग्रामीण इलाकों में लॉजिस्टिक्स और एग्री-बिजनेस के नए दरवाजे भी खोल रहा है. आने वाले समय में यह एक्सप्रेसवे किसानों के घर में खुशहाली और पैसा बरसाने वाला एक मजबूत जरिया बनेगा. जान लीजिए कैसे इस एक्सप्रेसवे से किसानों की आमदनी में उछाल आएगा.
दिल्ली की मंडी तक पहुंच होगी आसान
इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा बूस्ट उन किसानों को मिलेगा जो बागवानी और नकदी फसलों से जुड़े हैं. सहारनपुर और बागपत जैसे जिलों के किसान अब अपनी उपज सीधे दिल्ली की आजादपुर मंडी तक बिना किसी रुकावट के पहुंचा सकेंगे. पहले ट्रकों के जाम में फंसने से सब्जियां रास्ते में ही खराब हो जाती थीं.
लेकिन अब बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में भारी कमी आएगी. जब फसल कम समय और कम खर्च में मंडी पहुंचेगी. तो किसानों का शुद्ध मुनाफा खुद-ब-खुद बढ़ जाएगा. किसानॉ बिचौलियों के चंगुल से निकालकर सीधे बड़े खरीदारों और एक्सपोर्टर्स तक पहुंच बना सकेंगे.
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नए रोजगार के मौके
एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित गांवों की जमीनों की वैल्यू में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है. जिस जमीन की कीमत पहले काफी कम थी. अब वहां फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और वेयरहाउस बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. कई कंपनियां इन इलाकों में एग्रो-पार्क और कलेक्शन सेंटर बनाने की योजना बना रही हैं.
जिससे स्थानीय किसानों को न सिर्फ अपनी फसल बेचने की जगह मिलेग. बल्कि उनके परिवार के युवाओं को नए रोजगार भी मिलेंगे. सड़क किनारे विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर से ग्रामीण इकोनॉमी को एक नया पंख मिलेगा. जिससे किसानों की लाइफस्टाइल और आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
इन चीजों में नजर आएगा बदलाव
कनेक्टिविटी बेहतर होने से अब किसान पारंपरिक फसलों के बजाय ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. जिनकी मांग बड़े शहरों के मॉल्स में ज्यादा है. अब वे बेझिझक स्ट्रॉबेरी, मशरूम और ब्रोकली जैसी महंगी सब्जियों की खेती कर सकते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनका माल खराब होने से पहले बाजार पहुंच जाएगा. इसके साथ ही इस एक्सप्रेसवे की वजह से कृषि विशेषज्ञों का इन इलाकों में आना-जाना आसान होगा. जिससे किसानों को नई तकनीक और खाद-बीज की जानकारी घर बैठे मिल सकेगी.
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