Rice Planting Farm Tips: धान की रोपाई के बाद किसानों को सबसे ज्यादा चिंता खेत के पानी की होती है. रोपाई के शुरुआती हफ्तों में अगर खेत सूखने लगे और उसमें गहरी दरारें दिखाई देने लगें तो समझ लीजिए कि यह फसल के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. धान एक ऐसी फसल है जिसे शुरुआती दिनों में लगातार नमी की जरूरत होती है. जब बारिश समय पर नहीं होती या सिंचाई का सही इंतजाम नहीं हो पाता,
तो मिट्टी अपनी नमी खोने लगती है और तेज धूप के चलते वह सिकुड़ कर फटने लगती है. कई किसान इसे मामूली बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यह लापरवाही पूरी फसल को तबाह कर सकती है. खेत में दरारें पड़ने का सीधा असर पौधों की ग्रोथ और जड़ों के विकास पर पड़ता है. जिससे पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है. जानें ऐसे में क्या करना चाहिए आपको.
खेत में दरारें पड़ने से नुकसान
खेत में दरारें पड़ने का सबसे पहला नुकसान यह होता है कि पौधों की जड़ें सीधे हवा के संपर्क में आ जाती हैं. मिट्टी के फटने से जड़ें टूटने लगती हैं और धूप के चलते वे अंदर ही अंदर सूखने लगती हैं. जब जड़ें कमजोर हो जाती हैं. तो पौधा मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व और पानी नहीं सोख पाता.
नतीजतन धान के पौधे पीले पड़ने लगते हैं और उनकी ग्रोथ पूरी तरह रुक जाती है. धान की रोपाई के बाद शुरुआती 15 से 40 दिन का समय कल्ले निकलने के लिए सबसे जरूरी होता है. अगर इसी समय खेत में दरारें आ जाएं तो नए कल्ले बनना बंद हो जाते हैं. जिससे फसल में बालियां बहुत कम आती हैं.
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खेत में दरारें दिखें तो तुरंत करें ये काम
अगर धान के खेत में दरारें दिखाई दें तो सबसे पहले खेत में ठीक-ठाक सिंचाई करें जिससे मिट्टी दोबारा नम हो सके. कोशिश करें कि खेत में हल्की पानी की परत बनी रहे. जिससे दरारें धीरे-धीरे भर जाएं. जिन इलाकों में बिजली की दिक्कत हो वहां सिंचाई की पहले से प्लानिंग बनाना जरूरी है.
जिससे खेत ज्यादा देर तक सूखा न रहे. तो साथ ही खेत को रेगुलर तौर पर देखते रहें और कहीं भी बड़ी दरारें दिखें तो उन्हें नजरअंदाज न करें. समय पर की गई सिंचाई और नमी का सही प्रबंधन न सिर्फ पौधों को सुरक्षित रखता है बल्कि आगे चलकर अच्छा उत्पादन भी दिलाता है.
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