Farming Tips: बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आती है. लेकिन लगातार नमी और खेतों में जमा पानी कई बार बड़ी परेशानी भी खड़ी कर देता है. यही मौसम फसलों में बीमारियों के तेजी से फैलने वाला माना जाता है. शुरुआत में पत्तियों पर छोटे धब्बे या रंग बदलने जैसी मामूली दिखने वाली समस्याएं कुछ ही दिनों में पूरी फसल को प्रभावित कर सकती हैं. अगर समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
ऐसे मौसम में सिर्फ सिंचाई या खाद पर ध्यान देना काफी नहीं होता. बल्कि फसल की निगरानी भी उतनी ही जरूरी हो जाती है. जिससे बीमारी को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता है. इसलिए बारिश के बाद किसानों को थोड़ी ज्यादा देखभाल करने की जरूरत होती है. जिससे मेहनत से तैयार की गई फसल सुरक्षित रह सके.
बीमारी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें
बारिश के बाद सबसे ज्यादा खतरा फंगल रोगों का बढ़ जाता है. इनमें पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे, तनों का गलना, जड़ों में सड़न और पौधों का अचानक मुरझाना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार किसान इन संकेतों को सामान्य मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. जिससे बीमारी तेजी से पूरे खेत में फैल जाती है. इसलिए हर दो से तीन दिन में खेत में जाकर फसल को चेक करना जरूरी है.
इन पौधों को अलग कर दें
जिन पौधों में बीमारी के लक्षण दिखाई दें. उन्हें बाकी फसल से अलग रखने की कोशिश करें. खेत में लंबे समय तक पानी जमा न रहने दें. क्योंकि ज्यादा नमी रोग फैलने की सबसे बड़ी वजह बनती है. जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर फफूंदनाशी और दूसरी दवाओं का सही छिड़काव करें जिससे संक्रमण को समय रहते रोका जा सके.
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ऐसे करें फसल की देखभाल
फसलों को बीमारी से बचाने के लिए सबसे पहले खेत में पानी की निकासी का इंतजाम करें. बारिश रुकने के बाद खेत में बहुत देर तक पानी नहीं रुकना चाहिए. इसके साथ ही तय लिमिट में खाद का इस्तेमाल करें क्योंकि जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन भी कई रोगों को बढ़ावा दे सकती है. फसल के आसपास खरपतवार साफ रखें जिससे नमी और संक्रमण का खतरा कम हो. दवा का छिड़काव हमेशा मौसम साफ रहने पर करें. जिससे उसका असर बेहतर हो.
बचाव के लिए यह तरीके
अगर लगातार बारिश के चांस हो तो पहले से बचाव के उपाय अपनाना ज्यादा फायदेमंद रहता है. इसके अलावा समय समय पर कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह लेते रहें. सही तरीकों को अपनाकर किसान बारिश के बाद फैलने वाली बीमारियों से अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
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