Monson Crop Tips: गर्मी की तपिश खत्म होते ही जब मानसून की पहली फुहारें पड़ती हैं तो इंसानों के साथ-साथ हमारी खेती-किसानी भी खिल उठती है. अक्सर किसान भाई पारंपरिक फसलों के चक्कर में लग जाते हैं. लेकिन कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो बारिश का मौसम हरी सब्जियों की खेती के लिए सबसे बेस्ट और सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाला समय होता है. इस सीजन में बाजार में सब्जियों की भारी डिमांड रहती है. जिससे कीमतें हमेशा आसमान पर बनी रहती हैं.
अगर आप सही प्लानिंग और वैज्ञानिक तरीके से सब्जियों का चुनाव करें तो मानसून का यह सीजन आपके लिए असली जैकपॉट साबित हो सकता है. कृषि वैज्ञानिकों ने 8 ऐसी खास सब्जियों की लिस्ट तैयार की है जो इस मौसम में आपको बंपर पैदावार के साथ-साथ छप्परफाड़ कमाई भी कराएंगी. चलिए आपको इन 8 फसलों और वैज्ञानिकों के उस सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में देते हैं पूरी जानकारी.
लौकी, तोरई और कद्दू की फसलों से बंपर मुनाफा
बारिश के मौसम में लौकी, तोरई और कद्दू जैसी बेलदार सब्जियों की डिमांड मार्केट में सबसे ज्यादा बढ़ जाती है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इन फसलों को मानसून में उगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती जिससे लागत काफी कम हो जाती है. हालांकि जलभराव से बचाने के लिए इन्हें हमेशा ऊंचे बेड या मचान विधि का इस्तेमाल करके उगाना चाहिए.
मचान पर बेल चढ़ाने से फल जमीन के पानी और कीचड़ के संपर्क में नहीं आते जिससे वे सड़ने से बच जाते हैं और उनकी क्वालिटी एकदम चमकती हुई और फ्रेश रहती है. बाजार में साफ और सुंदर दिखने वाली लौकी और तोरई के दाम बहुत शानदार मिलते हैं.
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भिंडी और बैंगन कम लागत वाली फसलें
भिंडी और बैंगन दो ऐसी सदाबहार सब्जियां हैं जो बारिश के मौसम में किसानों के लिए रेगुलर इनकम का जरिया बनती हैं. मानसून के दौरान इन दोनों फसलों की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है. भिंडी की खेती के लिए वैज्ञानिकों का फॉर्मूला है कि खेतों में जल निकासी का इंतजाम एकदम परफेक्ट होना चाहिए क्योंकि जलभराव से इसकी जड़ें गल सकती हैं. वहीं अगर बैंगन की बात करें.
तो बारिश में इसमें कीटों का हमला होने का खतरा थोड़ा ज्यादा रहता है. इससे बचने के लिए वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि किसान भाई जैविक कीटनाशकों या नीम के तेल का नियमित छिड़काव करें. ये दोनों फसलें एक बार तैयार होने के बाद कई हफ्तों तक लगातार टूटती रहती है जिससे बाजार में हर दूसरे दिन माल बेचकर किसान भाई तगड़ा कैश कमा सकते हैं.
खीरा और करेला की भारी डिमांड
गर्मियों के बाद बारिश के सीजन में भी खीरा और करेला मार्केट के असली किंग साबित होते हैं. करेला अपनी औषधीय खूबियों की वजह से सालभर ऊंचे दामों पर बिकता है और मानसून में इसकी पैदावार बहुत बेहतरीन होती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक करेले और खीरे की खेती में भी मचान या मंडप विधि सबसे ज्यादा असरदार साबित होती है. जब खीरे और करेले की बेलें ऊपर हवा में फैलती हैं.
तो उन्हें भरपूर धूप और हवा मिलती है जिससे फंगस या सड़न की बीमारी लगने का चांस 90% तक कम हो जाता है. इसके अलावा बारिश के दिनों में खीरे में कड़वाहट की समस्या भी नहीं आती और फल एकदम रसीले और बड़े साइज के तैयार होते हैं. कम जगह और कम समय में तैयार होने वाली ये फसलें कम लागत में रिकॉर्डतोड़ रिटर्न देने की गारंटी हैं.
मिर्च और बीन्स छोटे निवेश वाली सब्जियां
मिर्च और बीन्स (जैसे लोबिया या बोरो) बारिश के मौसम में किसानों की किस्मत बदल सकती हैं. मिर्च की नर्सरी को बारिश शुरू होने से ठीक पहले तैयार कर लिया जाता है और मानसून आते ही खेतों में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है. तीखी और हरी मिर्च की मांग रेस्टोरेंट्स से लेकर हर घर की रसोई में रोज होती है. इसलिए इसके दाम कभी मंदी की मार नहीं झेलते. दूसरी तरफ, बीन्स यानी फलियों वाली सब्जियां न सिर्फ कम समय में बंपर पैदावार देती हैं.
बल्कि इनकी जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन फिक्स करती हैं जिससे खेत की उपजाऊ शक्ति अपने आप बढ़ जाती है. वैज्ञानिकों का फॉर्मूला साफ है कि इन 8 सब्जियों को मिक्स कॉपिंग या सही दूरी पर लाइनों में लगाकर किसान भाई इस मानसून में अपनी आमदनी को दोगुने से ज्यादा बढ़ा सकते हैं.
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