Friday, July 24, 2026
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भाजपा के ‘पांच ब्रह्मास्त्र’, जिसके दम पर TMC के किले में लगाई सेंध; बंगाल विजय की इनसाइड स्टोरी, West-bengal Hindi News


बंगाल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा को राज्य की 294 सीट में से 207 पर जीत मिली। इसी के साथ बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले 15 साल लंबे तृणमूल शासन का अंत हो गया। इसके लिए भाजपा ने बहुत ही सटीक रणनीति अपनाई थी।

बंगाल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा को राज्य की 294 सीट में से 207 पर जीत मिली। इसी के साथ बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले 15 साल लंबे तृणमूल शासन का अंत हो गया। इसके लिए भाजपा ने बहुत ही सटीक रणनीति अपनाई थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में शासन प्रणाली, कथित सिंडिकेट राज, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दे उठाने तथा प्रतिद्वंद्वियों पर किसी भी तरह के निजी हमलों से बचने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति ने राज्य की जनता को आकर्षित किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के माइक्रा मैनेजमेंट के बलबूते भाजपा बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के किले में सेंध लगाने में सफल रही। साथ ही उन क्षेत्रों में भी भाजपा करीब 50 फीसदी सीट जीतने में कामयाब रही, जहां मुस्लिमों की बड़ी आबादी है।

अभेद्य किले में सेंध
भाजपा सूत्रों के मुताबिक बंगाल चुनाव में भाजपा ने ‘पांच ब्रह्मास्त्र’ का इस्तेमाल किया। इनमें सांस्कृतिक पहचान और मांसाहार के मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ तृणमूल के ‘झूठे विमर्श’ को कुचलना शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान तथा घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भी काफी जोर दिया। जानकारी के मुताबिक शीर्ष नेतृत्व का हर गतिविधि का बारीकी से प्रबंधन करना और कार्यकर्ताओं का पूरे राज्य में मतदाताओं से जुड़ने के लिए अथक प्रयास करना पार्टी के अन्य ब्रह्मास्त्र थे। इस बार भाजपा ने जिन सीटों पर जीत हासिल की है, उनमें से कई सीटें तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला मानी जाती थीं।

‘खेला होबे’ की काट
चुनाव के दौरान जब तृणमूल कांग्रेस ‘खेला होबे’ का नारा गढ़ने में व्यस्त थी, तब दिग्गज रणनीतिकार शाह ने बड़े आत्मविश्वास के साथ एक साहसिक भविष्यवाणी की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पहले चरण की कुल 152 सीट में से भाजपा 110 से अधिक सीट पर शानदार जीत दर्ज करने के लिए तैयार है। पार्टी सूत्रों ने कहाकि विपक्ष ने इसे महज चुनावी दावा बताकर खारिज कर दिया था। हालांकि, जब नतीजे आए तो शाह का जमीनी स्तर पर बूथ प्रबंधन और राजनीतिक दूरदर्शिता सौ फीसदी सही साबित हुई। सूत्रों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा ने पहले चरण की 152 सीट में से 117 पर जीत हासिल की, जिससे स्पष्ट है कि चुनावी समीकरण पहले चरण के मतदान से ही भाजपा के पक्ष में थे।

खत्म किया 10 साल का दबदबा
दूसरे चरण में भी भाजपा ने ऐतिहासिक बढ़त हासिल करते हुए सीधे 90 सीट जीतीं, जो 2021 में उसकी मात्र 18 सीटों की तुलना में एक महत्वपूर्ण छलांग है। भाजपा के एक सूत्र ने कहा कि यह एकतरफा जनादेश है। भाजपा ने अपने वोट प्रतिशत में सात फीसदी से अधिक की वृद्धि करके 130 सीट का शानदार लाभ हासिल किया है। तृणमूल कांग्रेस ने पिछले 15 वर्षों से जिन 119 निर्वाचन क्षेत्रों पर लगातार कब्जा जमाए रखा था, उनमें से 62 फीसदी (74 सीट) छीनकर भाजपा ने अपनी अजेय लहर का अकाट्य प्रमाण पेश किया है। उसने बताया कि पिछले 10 वर्षों से जिन 162 सीट पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा कायम था, भाजपा ने उनमें से 102 सीट पर शानदार जीत दर्ज की।

मुस्लिम इलाकों में धमक
भाजपा की चुनाव रणनीति की सफलता का सबसे ‘ठोस सबूत’ ऐसे जिले हैं, जहां मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है। उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों में, जहां मुस्लिम आबादी 26-66 प्रतिशत तक है, भाजपा ने कुल 118 सीट में से 56 सीट जीतीं, जो 2021 में पार्टी को हासिल 14 सीट से कहीं अधिक है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने पश्चिम बंगाल के दस जिलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए तृणमूल का सूपड़ा साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा का गढ़ कहलाने वाले उत्तर बंगाल की बात करें, तो पार्टी ने कूच बिहार में नौ, जलपाईगुड़ी में सात, दार्जिलिंग में पांच, अलीपुर में पांच और कलिंपोंग में एक सीट जीती।

अमित शाह का डेरा
भाजपा ने दक्षिण बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में 16, पुरुलिया में नौ और झाड़ग्राम में चार सीट पर जीत हासिल की। एक सूत्र ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान जनता के मिजाज को भांपते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्यवाणी की थी कि तृणमूल कांग्रेस कई जिलों में अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी। बंगाल की जनता ने इस भविष्यवाणी को सच साबित कर दिया। सूत्रों ने कहाकि शाह के 15 दिनों तक पश्चिम बंगाल में डेरा डालने से भाजपा के चुनाव अभियान और रणनीति को मजबूती मिली। शाह की मौजूदगी और मार्गदर्शन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को ‘प्रेरित और उत्साहित’ किया, जिन्होंने 80,000 बूथ पर हर मतदाता तक पहुंच बनाने का प्रयास किया।



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