Fish Farming Tips: खेती में अब सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने का दौर धीरे धीरे बदल रहा है. अगर आपके पास एक तालाब है और आप उसमें सिर्फ मछली पाल रहे हैं या सिर्फ मखाना उगा रहे हैं. तो आप कमाई का एक बहुत बड़ा मौका छोड़ रहे हैं. बिहार के कई किसानों ने अब एक ऐसा फॉर्मूला ढूंढ निकाला है जिससे एक ही तालाब से डबल मुनाफा हो रहा है.
मखाना और मछली पालन एकसाथ खूब मुनाफा दे रहा है. इस तरीके से न तो आपकी लागत दोगुनी होती है और न ही मेहनत लेकिन जेब में आने वाला पैसा जरूर डबल हो जाता है. चलिए आपको बताते हैं कैसे एक छोटा सा तालाब किसानों की किस्मत बदल रहा है.
एक ही तालाब से डबल कमाई का मौका
इस अनूठे आइडिया की सबसे खूबसूरत बात यह है कि मखाना और मछली दोनों एक-दूसरे के लिए मददगार साबित होते हैं. जब आप तालाब में मखाना उगाते हैं. तो उसके बड़े-बड़े पत्ते पानी की सतह को ढक लेते हैं. यह पत्तियां मछलियों को तेज धूप और चिलचिलाती गर्मी से बचाकर एक नेचुरल शेड यानी छांव देने का काम करती हैं. यही नहीं.
मखाने के पौधों से निकलने वाले जैविक कचरे को खाकर मछलियां तेजी से बड़ी होती हैं. जिससे बाहर से दिए जाने वाले चारे का खर्च काफी हद तक कम हो जाता है. इस इंटीग्रेटेड फार्मिंग से तालाब का इकोसिस्टम इतना बढ़िया हो जाता है कि मखाने की क्वालिटी भी सुधरती है और मछलियों की ग्रोथ भी आम दिनों के मुकाबले ज्यादा तेज होती है.
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इस तरह होगी बचत
अब बात करते हैं उस चीज की जिसके लिए किसान दिन-रात पसीना बहाते हैं यानी सीधे-सीधे नेट प्रॉफिट. अगर आप अलग से मखाना और अलग से मछली पालन करेंगे, तो पट्टे का किराया, लेबर और देखरेख का खर्च दो बार देना पड़ेगा. लेकिन इस कंबाइंड सिस्टम में आपकी लागत सीधे आधी हो जाती है. एक ही बार पानी का मैनेजमेंट करना है और एक ही बार रखवाली करनी है.
जब मखाने की फसल तैयार होती है, तो उसे बाजार में बेचकर तगड़ा कैश मिलता है और उसी तालाब से निकलने वाली मछलियां लोकल मार्केट में हाथों-हाथ ऊंचे दामों पर बिक जाती हैं. खर्च काटकर यह मॉडल हर सीजन में किसानों को पारंपरिक फसलों के मुकाबले तीन से चार गुना ज्यादा नेट प्रॉफिट दे रहा है.
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