Goat Farming Tips: आजकल बकरी पालन से किसान खूब मुनाफा कमा रहे हैं और इसी मुनाफे को दोगुना करने के लिए मथुरा के मखदूम में स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी खुशखबरी दी है. वैज्ञानिकों ने बकरियों के लिए बेहद खास और अनोखा रेडिमेड संतुलित आहार तैयार किया है. जिसे खाने से बकरियों की सेहत और दूध दोनों में जादुई बदलाव देखने को मिलेगा. आमतौर पर बाजार में गाय, भैंस के लिए ही ऐसे स्पेशल पैक्ड फूड मिलते थे.
लेकिन अब बकरियों के लिए भी यह सुविधा आ गई है. इस नए आविष्कार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बहुत मजबूत कर देता है जिससे वे संक्रामक बीमारियों से बची रहती हैं. इसके साथ ही इससे बकरियों का वजन और दूध देने की क्षमता भी तेजी से बढ़ती है जिससे पशुपालकों की कमाई और ज्यादा बढ़ जाएगी.
बीमारियों से सुरक्षा
संस्थान के वैज्ञानिकों ने बकरियों को ध्यान में रखकर अलग-अलग तरह के फीड तैयार किए हैं. इनमें से एक है कॉक्सीचेक एच जो बकरियों की आंतों में होने वाली खतरनाक संक्रामक बीमारी कोक्सीडियोसिस से उनका बचाव करता है. इस आहार में अनाज, चोकर और मिनरल मिक्सर के साथ-साथ कई खास औषधीय पौधों का अर्क मिलाया गया है जो गंदा पानी या दूषित चारा खाने से फैलने वाले परजीवियों को मार देते हैं.
पर्यावरण को मिलेगा तगड़ा फायदा
इसके अलावा वैज्ञानिकों ने मेथलो एच नाम का एक और कमाल का आहार बनाया है. यह आहार बकरियों के शरीर से निकलने वाली मिथेन गैस के उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर देता है. यह मिथेन गैस ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार होती है इसलिए यह अनोखा भोजन बकरियों का वजन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में मदद करता है.
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दूध उत्पादन में 25% की भारी बढ़ोतरी
दूध देने वाली बकरियों के लिए वैज्ञानिकों ने सहजन (मोरिंगा) पर आधारित एक स्पेशल कंप्लीट फीड तैयार किया है. रिसर्च और ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि इस मोरिंगा फीड को खाने से बकरियों के दूध उत्पादन में 15 से लेकर 25 फीसदी तक की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई. इतना ही नहीं यह आहार बकरियों में होने वाले दर्दनाक थनैला रोग (थनों की सूजन) को रोकने में भी बहुत मददगार साबित हुआ है.
बेहद कम लागत
बकरियों की हेल्थ में सुधार करने वाला यह चमत्कारी भोजन जेब पर भी भारी नहीं पड़ेगा. इसे तैयार करने की शुरुआती लागत सिर्फ 16 से 18 रुपये प्रति किलोग्राम आई है. संस्थान ने इसे बड़े पैमाने पर मार्केट में उतारने के लिए मुंबई और इंदौर की कंपनियों से हाथ मिलाया है, जिससे जल्द ही यह किसानों को और भी कम दामों में मिलने लगेगा.
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