Tuesday, May 12, 2026
Google search engine
Homeकृषि समाचारहोर्मुज संकट के बीच खाद की कमी, किसान ऐसे शुरू करें आर्गेनिक...

होर्मुज संकट के बीच खाद की कमी, किसान ऐसे शुरू करें आर्गेनिक खेती


Organic Farming Tips:  भारत में खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले खाद की किल्लत और होर्मुज संकट ने खेती-किसानी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. वैश्विक स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव के कारण यूरिया और डीएपी जैसे जरूरी खादों की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है. जिससे न केवल इनकी कीमतों में उछाल आया है.

बल्कि भारत के घरेलू खाद उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ा है. ऐसे समय में जब केमिकल खाद का मिलना मुश्किल और महंगा होता जा रहा है. किसानों के पास आर्गेनिक यानी जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाने का यह सबसे सही मौका है. जान लीजिए कैसे किसान खाद संकट के बीच जैविक खेती कर सकते हैं. 

होर्मुज संकट से हुई खाद की कमी

फरवरी 2026 से होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी ब्लॉक के कारण भारत की खाद आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है, क्योंकि हमारी यूरिया और प्राकृतिक गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है. सिचुएशन यह है कि यूरिया की कीमतें 510 डॉलर प्रति टन से बढ़कर लगभग 950 डॉलर तक पहुँच गई हैं और भारत के पास खरीफ सीजन के लिए जरूरी खाद का स्टॉक मांग के मुकाबले केवल 51 प्रतिशत के करीब ही उपलब्ध है. 

घरेलू कारखानों में एलएनजी (LNG) की कमी के चलते यूरिया का उत्पादन भी गिरकर 1.5 मिलियन टन प्रति माह रह गया है, जो सामान्य से काफी कम है. शिपिंग रूट बंद होने और मालभाड़े में हुई भारी बढ़ोतरी ने किसानों के लिए लागत का संकट पैदा कर दिया है. जिससे अब खेती के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आत्मनिर्भर मॉडलों को अपनाने की जरूरत बढ़ गई है.

यह भी पढ़ें: Tulsi Plant Care: तुलसी के पौधे को रोज देते हैं पानी फिर भी सूख जाता है? करें ये काम

किसान ऐसे शुरू करें आर्गेनिक खेती

खाद के इस संकट से निपटने के लिए किसान भाइयों को अब अपने खेतों में ही खाद कारखाना शुरू करना होगा. जिसे हम आर्गेनिक या जैविक खेती कहते हैं. इसकी शुरुआत करने के लिए सबसे पहले मिट्टी को प्राकृतिक पोषण देना जरूरी है, जिसके लिए किसान गोबर खाद, वर्मी-कंपोस्ट और वेस्ट डीकंपोजर का इस्तेमाल कर सकते हैं. किसान घर पर ही ‘जीवामृत’ बना सकते हैं, जो गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन के घोल से तैयार होता है और रसायनिक खाद से कहीं बेहतर परिणाम देता है.

इन तरीकों को आजमाएं

इसके अलावा फसल चक्र यानी क्रॉप रोटेशन को अपनाकर और दलहनी फसलों को उगाकर मिट्टी की नाइट्रोजन शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाया जा सकता है. कीट नियंत्रण के लिए महंगे कीटनाशकों की जगह नीम का तेल या दशपर्णी अर्क जैसे जैविक विकल्पों को अपनाना न केवल लागत कम करता है.

बल्कि फसल को भी जहरीला होने से बचाता है. आज के दौर में आर्गेनिक उत्पादों की मांग शहरों में बहुत ज्यादा है. इसलिए इस आधुनिक तरीके को अपनाकर किसान खाद की कमी से भी बच सकते हैं और अपनी उपज का बेहतर दाम भी पा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: 5 हजार का निवेश और 25 हजार की कमाई, गाजर की इस खेती से किसानों ने कमाया मोटा मुनाफा



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments