नई दिल्ली: उत्तराखंड में चार धाम राजमार्ग परियोजना पर एक निर्माणाधीन सुरंग के ढहने से उसके मलबे के भीतर 12 नवंबर से फंसे 40 श्रमिकों को बाहर निकलने की जद्दोजहद जारी है. सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए सुरंग में पाइप से ‘एस्केप सुरंग’ बनाने के लिए खुदाई शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि 40 श्रमिकों को बाहर निकालने में 24 घंटे से अधिक का समय लग सकता है. दरअसल, चारधाम ‘ऑल वेदर’ सड़क परियोजना के तहत निर्माणाधीन सिलक्यारा-डंडालगांव सुरंग का एक हिस्सा रविवार को भूस्खलन से ढह गया था और तब से श्रमिक उसके अंदर फंसे हुए हैं. उन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव एवं राहत अभियान जारी है.
बचाव एवं राहत कार्यों की निगरानी कर रहे उत्तरकाशी के जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला ने बताया कि मिट्टी खुदाई करने वाली ऑगर मशीन और 900 मिलीमीटर व्यास के पाइप सुबह ही मौके पर पहुंचा दिए गए थे और सुरंग में ‘ड्रिलिंग’ (खुदाई) शुरू कर दी गई है. देहरादून से बोरिंग मशीनें और आठ विशेषज्ञों की एक टीम उस स्थान पर है, जहां यमुनोत्री-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा और बारकोट के बीच आगामी 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग का एक हिस्सा भूस्खलन के कारण ढह गया, जिससे मजदूर फंस गए. बता दें कि 853 करोड़ रुपये की सुरंग चार धाम ऑल वेदर रोड परियोजना का हिस्सा है. 12 नवंबर को सुबह करीब 5.30 बजे उस वक्त 100 मीटर लंबी छत गिर गई, जब मजदूर री-प्रोफाइलिंग का काम कर रहे थे.
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों की मानें तो मलबे में एक पाइप डालने के लिए विशेष मशीनें तैनात की गई हैं ताकि फंसे हुए श्रमिकों को इसके माध्यम से निकाला जा सके, उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर मिट्टी की स्थिति के कारण बचाव अभियान अपने आप में एक कठिन चुनौती है. यही एक रास्ता है. वहां की मिट्टी भुरभुरी है. बोरिंग बहुत सावधानी से करनी होगी, नहीं तो बचाव कार्य में लगी मशीनें भी ध्वस्त हो सकती हैं. इंडिया टुडे ने आपदा प्रबंधन, उत्तराखंड के सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा के हवाले से यह जानकारी दी.
भारत का सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड यानी नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के अधिकारियों ने दावा किया कि फंसे हुए श्रमिकों के पास घूमने के लिए पर्याप्त जगह है और उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया है. उनका मानना है कि श्रमिक मलबे के नीचे दबे हुए हैं, यह सच नहीं है. छत बीच में ही ढह गई. शुक्र है कि उनके घूमने-फिरने के लिए सुरंग के अंदर की ओर लगभग 2 किमी की खुली जगह है. अधिकारियों ने कहा कि सुरंग के नीचे बिजली की व्यवस्था कर दी गई है और वॉकी-टॉकी के माध्यम से कार्यकर्ताओं से संपर्क स्थापित किया गया है. उन्होंने (फंसे हुए श्रमिकों ने) कहा कि वे ठीक हैं मगर उन्हें भोजन की आवश्यकता है. हम उन्हें ड्राई फ्रूट्स की आपूर्ति करने के लिए 4 इंच व्यास का एक प्रेशर पाइप डालने में सक्षम है.
नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कहा कि बचाव अभियान में सभी विभागों की टीमों को लगाया गया है और श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं और पर्याप्त मशीनें लगाई गई हैं. हालांकि, नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने यह नहीं बताया कि यह अभियान कब तक पूरा होगा. सड़क परिवहन मंत्रालय के बयान में कहा गया कि फंसे हुए श्रमिकों को जल्द से जल्द निकालने के लिए सभी समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं.
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला ने तकनीकी विशेषज्ञों के हवाले से उन्होंने कहा, ‘अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो बुधवार तक सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा.’ मलबे में खुदाई को लेकर ऑगर मशीन को स्थापित करने के लिए मंच बनाने में लगभग पूरा दिन लग गया. अधिकारियों ने कहा कि अब मलबे के आरपार पाइप डालने की प्रक्रिया शुरू होगी. पाइप डालने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों एवं इंजीनियरों की टीम घटनास्थल पर मौजूद है, जिसकी अगुवाई उत्तराखंड पेयजल निगम के महाप्रबंधक एवं ड्रिलिंग और बोरिंग के विशेषज्ञ दीपक मलिक कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार, क्षैतिज खुदाई के जरिए पाइप डालकर मजदूरों की निकासी के लिए ‘एस्केप सुरंग’ बनाई जाएगी जिसके जरिए श्रमिकों को बाहर निकाला जाएगा.

आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने इससे पहले कहा था कि बुधवार तक सभी श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया जाएगा. उधर, सुरंग में फंसे सभी श्रमिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं जिन्हें पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन, पानी, सूखे मेवे सहित अन्य खाद्य सामग्री, बिजली, दवाइयां आदि पहुंचाई जा रही हैं. उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने मौके का मुआयना करने के बाद संवाददाताओं को बताया, ‘अब तक की अद्यतन स्थिति के अनुसार सुरंग में फंसे सभी 40 श्रमिक सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया कि एक श्रमिक को उल्टी आने की समस्या है इसलिए उन तक दवाइयां भी पहुंचा दी गयी हैं. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रतिवादन बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, सीमा सड़क संगठन के 160 बचावकर्मियों का दल दिन रात बचाव कार्यों में जुटा हुआ है. (इनपुट भाषा से भी)
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FIRST PUBLISHED : November 15, 2023, 06:52 IST


