Thursday, April 30, 2026
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गर्मियों में मछली पालन करने वाले किसान एक्सपर्ट्स की ये बातें गांठ बांध लें, वरना होगा भारी नुकसान


Fish Farming Tips: गर्मियों का मौसम मछली पालकों के लिए जितनी मुनाफे के मौके लेकर आता है. उससे कहीं ज्यादा चुनौतियां भी खड़ी कर देता है. जैसे-जैसे पारा चढ़ता है तालाब के पानी का तापमान भी बढ़ जाता है. जो मछलियों की सेहत के लिए सीधा खतरा बन सकता है. बढ़ते तापमान की वजह से पानी में ऑक्सीजन का लेवल तेजी से गिरने लगता है.

जिससे मछलियां दम तोड़ने लगती हैं. अगर इस दौरान सावधानी न बरती जाए तो मछलियां मर सकती हैं और आपको भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह मानकर समय रहते कुछ जरूरी कदम उठाना बहुत जरूरी है .जिससे आपकी मछलियां सुरक्षित रहें और उनकी ग्रोथ पर कोई बुरा असर न पड़े. जान लीजिए एक्सपर्ट्स के टिप्स.

पानी का तापमान सही रखना

गर्मी में सबसे बड़ी समस्या तालाब के पानी का गर्म होना है. जब पानी का तापमान 32-35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है. तो मछलियों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. इससे बचने के लिए तालाब में पानी का लेवल कम से कम 5 से 6 फीट बनाए रखना चाहिए जिससे गहराई में पानी ठंडा रहे.

  • तालाब में एरिएटर (Aerator) का इस्तेमाल करें जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे और मछलियां स्वस्थ रहें.
  • ताजे पानी की सप्लाई समय-समय पर करते रहें, जिससे गर्म पानी का तापमान नियंत्रित करने में मदद मिले.

सुबह और शाम के समय पानी का छिड़काव करना भी तापमान को कम रखने का एक सही तरीका हो सकता है.

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फीडिंग पर दें खास ध्यान

गर्मियों में मछलियों की पाचन शक्ति और मेटाबॉलिज्म बदल जाता है. इसलिए उनके खान-पान में सावधानी बरतना जरूरी है. ज्यादा तापमान होने पर मछलियां खाना कम कर देती हैं. ऐसे में अगर आप जरूरत से ज्यादा चारा डालेंगे. तो वह पानी के नीचे सड़ जाएगा और अमोनिया जैसी जहरीली गैसें पैदा करेगा.

  • चिलचिलाती धूप में दोपहर के समय चारा देने से बचें. इसकी जगह सुबह या सूरज ढलने के बाद ही फीडिंग कराएं.
  • चारे की क्वांटिटी कम रखें और कोशिश करें कि वह हाई-क्वालिटी का हो ताकि पानी गंदा न हो.

अगर पानी का रंग ज्यादा गहरा हरा हो जाए. तो समझ लें कि तालाब में नेचुरल फूड ज्यादा है और बाहर से फीड देना तुरंत कम कर दें.

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बीमारियों से बचाव के टिप्स

तापमान बढ़ते ही बैक्टीरिया और परजीवी तालाब में सक्रिय हो जाते हैं. जिससे मछलियों में फंगल इन्फेक्शन या पंख सड़ने जैसी बीमारियां होने का डर रहता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि हफ्ते में एक बार पानी की जांच जरूर करें और उसके पीएच (pH) लेवल को मेंटेन रखें.

  • तालाब के आसपास छायादार पेड़ लगाएं या जाली का इस्तेमाल करें ताकि सीधी धूप पानी को ज्यादा गर्म न कर सके.
  • समय-समय पर पोटैशियम परमैंगनेट या चूने का सही मात्रा में इस्तेमाल करें जिससे पानी की शुद्धता बनी रहे.

मछलियों की एक्टिविटी पर नजर रखें. अगर वे बार-बार सतह पर आकर मुंह चला रही हैं. तो यह खतरे का संकेत है और आपको तुरंत ताजे पानी या ऑक्सीजन बढ़ाना चाहिए.

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