Saturday, March 28, 2026
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होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से खाद की सप्लाई भी अटकी, जानें यह रोक तेल-गैस की कमी से कितनी खतरनाक?


Problems Due To Fertilizers Shortage: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता बंद होना पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. आमतौर पर जब भी इस समुद्री रास्ते की बात होती है. तो सबका ध्यान सिर्फ कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों पर ही जाता है. लेकिन इस बार मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल और गैस तक सीमित नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट के जरिए खाद की सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है. 

जो सीधे तौर पर दुनिया की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है. भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है. क्योंकि हमारी खेती काफी हद तक विदेशी खाद और कच्चे माल पर निर्भर करती है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक ब्लॉक रहता है. तो आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना तय है. जान लें आगे चलकर यह कितना खतरनाक हो सकता है. 

खाद की सप्लाई पर क्यों मंडरा रहा खतरा?

होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ तेल के जहाजों का रास्ता नहीं है. बल्कि यह ग्लोबल फर्टिलाइजर मार्केट की लाइफलाइन भी है. दुनिया का एक बड़ा हिस्सा खाद बनाने के लिए जरूरी रॉ मटेरियल्स और तैयार प्रोडक्ट्स के लिए इसी रूट का इस्तेमाल करता है. इस रास्ते पर रोक लगने का मतलब है कि सप्लाई चेन में बड़ा गैप आना जिसका सीधा असर किसान की लागत पर पड़ेगा.

  • इस रूट के बंद होने से जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा जिससे माल पहुंचने में वक्त लगेगा.
  • समुद्री जहाजों का किराया और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से खाद की बोरी महंगी हो सकती है.
  • पोटाश और फॉस्फेट जैसे जरूरी एलिमेंट्स की किल्लत मार्केट में ब्लैक मार्केटिंग बढ़ा सकती है.
  • समय पर खाद न मिलने से बुवाई के सीजन में किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.

सप्लाई चेन का यह संकट खेती की पूरी इकोनॉमी को हिलाने की ताकत रखता है और इसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा.

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तेल और गैस से भी ज्यादा खतरनाक है यह संकट?

देखा जाए तो तेल और गैस की कमी से गाड़ियां या फैक्ट्रियां रुक सकती हैं, लेकिन खाद की कमी सीधे थाली पर हमला करती है. जब खेत में डालने के लिए खाद नहीं होगी, तो पैदावार घटेगी और अनाज की कीमतें आसमान छूने लगेंगी. तेल का विकल्प तो फिर भी इलेक्ट्रिक या रिन्यूएबल एनर्जी में मिल सकता है, लेकिन फसल उगाने के लिए खाद का कोई तुरंत रिप्लेसमेंट मौजूद नहीं है.

  • अनाज और सब्जियों के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ेगा.
  • कई देशों में भुखमरी और आर्थिक अस्थिरता जैसे हालात पैदा होने का डर है.
  • हम यूरिया और डीएपी जैसे खादों के लिए काफी हद तक इम्पोर्ट पर टिके हैं
  • कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार को भारी-भरकम सब्सिडी देनी पड़ सकती है

खाद और तेल की सप्लाई में हो रही यह रुकावट ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक बड़ा अलार्म है जिसका समाधान जल्द जरूरी है.

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