Fertilizer Subsidy: अच्छी फसल के लिए बीज और खेत की सही देखभाल के साथ-साथ खाद की भी उतनी ही अहमियत है, क्योंकि यह जमीन को उपजाऊ बनाती है और भारत जैसे कृषि प्रधान देश में सरकार खेती से जुड़ी कई योजनाएं चलाती रहती है. उन्हीं में से एक खाद से जुड़ी योजना भी है. इन सब्सिडी से किसानों को मदद मिलती है ताकि वे कम लागत में अच्छी खेती कर सकें और उनकी आय में सुधार हो सके.
क्या है खाद सब्सिडी?
खाद सब्सिडी एक तरह की सरकार द्वारा दी गई आर्थिक सहायता है, जो फर्टिलाइजर कंपनियों को दी जाती है ताकि वे किसानों को कम कीमत में खाद बेच सकें. यानी इस प्रक्रिया में किसान को सीधे पैसे नहीं मिलते, बल्कि खाद की कीमत पहले से ही कम कर दी जाती है.
किन-किन तरह की खादों पर मिलती है सब्सिडी
- UREA
- DAP (डायमोनियम फॉस्फेट)
- MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश)
- NPK (मिक्स्ड फर्टिलाइजर)
यूरिया पर सरकार सबसे ज्यादा सब्सिडी मुहैया करवाती है, इसलिए इसकी कीमत बाकी खादों की तुलना में बहुत कम होती है.
सब्सिडी मिलने का क्या प्रोसेस है
- फर्टिलाइजर कंपनियां खाद का उत्पादन करती हैं और उसे बाजार में भेजा जाता है.
- जब किसान खाद खरीदने के लिए जाता है, तब दुकानदार पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन में किसान का आधार नंबर या मोबाइल दर्ज करता है.
- आधार के द्वारा ही किसान की पहचान की जाती है, इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि खाद सही व्यक्ति को दी जा रही है.
- जैसे ही खाद की बिक्री दर्ज हो जाती है, फर्टिलाइजर कंपनियां सरकार से सब्सिडी क्लेम कर लेती हैं.
- सरकार द्वारा फर्टिलाइजर कंपनियों को आर्थिक सहायता दे दी जाती है.
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किसानों को क्या करना होता है जरूरी
लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना होता है, जैसे
- आधार कार्ड होना जरूरी होता है.
- मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए.
- खाद खरीदते समय अपनी सही जानकारी देना.
- और अधिकृत दुकानों से ही खाद खरीदना.
सब्सिडी के फायदे
- किसानों को सस्ते दर पर खाद मिल पाती है.
- खेती करने का खर्च कम आता है.
- उत्पादन में वृद्धि होती है.
- कालाबाजारी और जमाखोरी पर भी नियंत्रण बना रहता है.
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