Dairy Farming Tips: जैसे-जैसे गर्मी का पारा बढ़ रहा है. पशुपालकों के लिए अपने मवेशियों की देखभाल करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. भीषण गर्मी का सीधा असर गाय और भैंसों की सेहत और उनकी दूध देने की क्षमता पर पड़ता है. अक्सर देखा जाता है कि इस मौसम में पशु पानी पीना कम कर देते हैं या उन्हें जरूरत के मुताबिक ठंडा पानी नहीं मिल पाता.
जिसका नतीजा दूध उत्पादन में गिरावट के तौर पर सामने आता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लू और बढ़ते तापमान के कारण पशुओं के शरीर में पानी की कमी हो जाती है. जो न केवल उनकी उत्पादकता घटाती है बल्कि उन्हें गंभीर बीमारियों की ओर भी धकेल सकती है. इसलिए इस मौसम में पशुओं के खान-पान और पानी के मैनेजमेंट पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी है.
दूध बढ़ाने के लिए पानी का सही मैनेजमेंट
दूध का एक बड़ा हिस्सा पानी होता है. इसलिए अगर पशु पर्याप्त पानी नहीं पिएगा. तो दूध की मात्रा गिरना तय है. गर्मियों में एक दुधारू गाय या भैंस को सामान्य से कहीं ज्यादा पानी की जरूरत होती है. कोशिश करें कि पशु को दिन में कम से कम 4 से 5 बार साफ और ताजा पानी पिलाएं. पानी बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए.
इसलिए टंकियों को छाया में रखें या उनमें ताजे पानी की सप्लाई सुनिश्चित करें. अगर पशु पानी पीने में आनाकानी करे. तो पानी में हल्का नमक या गुड़ मिलाकर उसे स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. शरीर में नमी बनी रहेगी. तभी पशु का मेटाबॉलिज्म सही रहेगा और दूध का उत्पादन स्थिर बना रहेगा.
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लू और हीट स्ट्रेस से पशुओं का बचाव
गर्मी के मौसम में पशुओं को लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. जिसे हीट स्ट्रेस कहा जाता है. इसके लक्षण पहचानने बहुत जरूरी हैं. जैसे पशु का मुंह खोलकर हांफना, लार गिरना या सुस्त हो जाना. इससे बचने के लिए पशुओं को दोपहर के समय सीधे धूप में न बांधें.
उनके बांधने की जगह हवादार होनी चाहिए और छत पर घास-फूस या बोरी डालकर तापमान कम रखा जा सकता है. अगर हो तो दोपहर में पशुओं के शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करें या उन्हें नहलाएं. इससे उनके शरीर का तापमान कंट्रोल में रहता है और वे तनावमुक्त रहते हैं. जिससे उनकी सेहत और दूध देने की क्षमता पर बुरा असर नहीं पड़ता.
पशुओं की डाइट में करें बदलाव
भीषण गर्मी में पशुओं के चारे और डाइट में बदलाव करना भी मुनाफे का सौदा साबित होता है. इस समय उन्हें सूखा भूसा देने के बजाय हरा चारा ज्यादा खिलाना चाहिए. क्योंकि इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है. पशुओं को सुबह और शाम के ठंडे समय में ही चारा देना बेहतर रहता है.
इसके अलावा, डाइट में मिनरल मिक्सचर और नमक की मात्रा थोड़ी बढ़ा दें. क्योंकि पसीने के जरिए उनके शरीर से जरूरी पोषक तत्व निकल जाते हैं. संतुलित आहार और सही पोषण न केवल पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. बल्कि दूध में फैट की मात्रा को भी बनाए रखने में मदद करता है. सही देखभाल ही इस मौसम में पशुपालन को सफल बनाएगी.
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