Vegetable Farming In May: मई की तपती गर्मी को देखते हुए अक्सर किसान भाई खेती-बाड़ी से थोड़ा ब्रेक ले लेते हैं. लेकिन आपको बता दें यही समय सबसे बड़ी कमाई का मौका लेकर आता है. इस महीने में अगर आप पारंपरिक फसलों के बजाय कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसलों (Cash Crops) का चुनाव करें. तो अगले 90 दिनों के भीतर आपकी जेब में लाखों रुपये आ सकते हैं.
असल में गर्मियों के दौरान बाजार में ताजी सब्जियों की सप्लाई कम हो जाती है. जिससे इनके दाम आसमान छूने लगते हैं. अगर आप सही प्लानिंग और तकनीक के साथ इन फसलों की बुवाई करते हैं. तो भीषण गर्मी के बावजूद आप बंपर उत्पादन और तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. जान लीजिए
मुनाफे वाली सब्जियां
मई के महीने में भिंडी, लौकी, तोरई, करेला और खीरे जैसी फसलों की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है. इन फसलों की खासियत यह है कि इन्हें बहुत ज्यादा समय नहीं चाहिए और ये बहुत जल्दी फल देने लगती हैं. बुवाई करते समय उन्नत बीजों का इस्तेमाल करें और बीजों को सीधे खेत में लगाने के बजाय अगर संभव हो तो उनकी नर्सरी तैयार कर लें.
मचान विधि (Treallising) से लौकी और करेले की खेती करने पर फलों की क्वालिटी अच्छी रहती है और सड़ने का डर भी कम होता है. इन सब्जियों को अगर आप मई के पहले पखवाड़े में लगा देते हैं. तो जून-जुलाई की शादियों और त्योहारों के सीजन में आपको इनका बहुत ही बेहतरीन मंडी भाव मिलता है.
यह भी पढ़ें: कपास की खेती के लिए मौसम हुआ मेहरबान, बुवाई के इस तकनीक से कई गुना बढ़ जाएगा उत्पादन
इन बातों का रखें ध्यान
गर्मी के मौसम में खेती की सबसे बड़ी चुनौती पानी का मैनेजमेंट है. मई में बोई गई फसलों के लिए ड्रिप इरिगेशन या बूंद-बूंद सिंचाई सबसे बेस्ट मानी जाती है. क्योंकि इससे पौधों की जड़ों में नमी बनी रहती है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती. खाद के तौर पर गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें. क्योंकि ये मिट्टी की जलधारण क्षमता को बढ़ाते हैं.
दोपहर की तेज धूप से पौधों को बचाने के लिए मल्चिंग तकनीक का सहारा लेना भी एक समझदारी भरा कदम है. मिट्टी की नमी बरकरार रखने से पौधों का विकास तेजी से होगा और फल भी रसीले व चमकदार बनेंगे. जिससे ग्राहक आपकी फसल को देखते ही खरीदने के लिए तैयार हो जाएगा.
ऐसे होगी लाखों की कमाई
अगर आप एक एकड़ में भी इन सब्जियों की मिश्रित खेती (Mixed Farming) करते हैं. तो लागत निकालने के बाद आराम से लाख रुपये से ज्यादा की बचत की जा सकती है. उदाहरण के तौर पर भिंडी और खीरा ऐसी फसलें हैं जो हर दूसरे-तीसरे दिन तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं.
जिससे किसान के पास डेली कैश फ्लो बना रहता है. हालांकि इस मौसम में कीटों और बीमारियों का खतरा भी रहता है. इसलिए नियमित रूप से नीम के तेल या जैविक कीटनाशकों का छिड़काव करते रहें. फसल की तुड़ाई हमेशा सुबह के ठंडे समय में करें ताकि सब्जी की ताजगी बनी रहे.
यह भी पढ़ें: हजारों रुपये बचाएगा यह देसी नुस्खा, फसल के लिए नीम से बनाएं ऑर्गेनिक कीटनाशक


