Green Fodder Preservation Methods : पशुपालन आज के समय में किसानों की इनकम बढ़ाने का एक मजबूत जरिया बन चुका है, लेकिन इस काम में सबसे बड़ी समस्या साल भर पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध कराना होती है. बरसात और सर्दियों में तो चारा आसानी से मिल जाता है, लेकिन गर्मियों या सूखे के समय इसकी भारी कमी हो जाती है. ऐसे में पशुओं के दूध उत्पादन पर असर पड़ता है और उनकी सेहत भी कमजोर हो सकती है. इसी समस्या का हल हरे चारे को सही तरीके से सुरक्षित करके रखना है , जिससे जरूरत पड़ने पर उसे इस्तेमाल किया जा सके. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किसान कौन सा तरीका अपनाएं.
ये दो तरीके अपनाएं किसान
हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किसान दो आसान तरीके अपना सकते हैं. इसके लिए दो आसान और उपयोगी तरीके साइलेज (Silage) और हे (Hay) हैं. इन दोनों तरीकों से किसान ऑफ-सीजन में भी पशुओं को अच्छा और संतुलित आहार दे सकते हैं, जिससे उनकी सेहत और दूध उत्पादन बेहतर बना रहता है.
साइलेज क्या होता है?
साइलेज हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की एक खास तकनीक है. इसमें मक्का, ज्वार, बाजरा या नेपियर घास जैसे चारे को काटकर बिना हवा के बंद जगह में रखा जाता है. इस दौरान चारा हल्का-सा खट्टा होकर सुरक्षित हो जाता है, जिसे पशु आसानी से खा लेते हैं. इस प्रक्रिया में चारे की पौष्टिकता काफी हद तक बनी रहती है, इसलिए यह पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
साइलेज बनाने की आसान प्रक्रिया
1. सही समय पर कटाई – चारे की फसल को न ज्यादा कच्चा और न ज्यादा पका होना चाहिए. मध्यम अवस्था सबसे बेहतर रहती है.
2. छोटे टुकड़ों में काटना – कटे हुए चारे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें, ताकि उसे अच्छे से दबाया जा सके.
3. साइलो में भरना – अब इस चारे को गड्ढे, टैंक या प्लास्टिक बैग में डालें और अच्छी तरह दबाएं, जिससे उसमें हवा बिल्कुल न रहे.
4. अच्छी तरह बंद करना – ऊपर से प्लास्टिक शीट या मिट्टी डालकर पूरी तरह बंद कर दें.
5. तैयार होने का समय – लगभग 40-60 दिनों में साइलेज तैयार हो जाता है. इसका रंग हल्का हरा या पीला और खुशबू हल्की खट्टी होती है.
हे (Hay) क्या होता है?
हे बनाने का तरीका साइलेज से अलग होता है. इसमें हरे चारे को सुखाकर सुरक्षित रखा जाता है. यह तरीका खासकर पतली घास या छोटे तने वाले चारे के लिए अच्छा माना जाता है.
यह भी पढ़ें – मई में करें इन 5 फसलों की खेती, 3 महीने में लाख रुपये तक की कमाई, जानें पूरा गणित
हे कैसे बनाया जाता है?
हे बनाने के लिए सबसे पहले चारे की फसल को सही समय पर काटना जरूरी होता है. इसके बाद कटे हुए चारे को साफ जगह या जाली पर फैला कर अच्छी तरह सुखाया जाता है, जिससे उसमें मिट्टी न लगे और फंगस का खतरा कम हो. चारे को तब तक सुखाना चाहिए जब तक उसकी नमी लगभग 15-18 प्रतिशत न रह जाए, क्योंकि ज्यादा नमी रहने पर चारा खराब हो सकता है. पूरी तरह सूखने के बाद इस चारे को बंडल बनाकर किसी सूखी और हवादार जगह पर स्टोर किया जाता है, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर पशुओं को खिलाया जा सकता है.
साइलेज और हे के फायदे
इन दोनों तरीकों को अपनाने से किसानों को कई फायदे मिलते हैं. जैसे साल भर पशुओं के लिए चारा उपलब्ध रहता है. दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है. इसके अलावा पशुओं की सेहत बेहतर रहती है. बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत कम होती है. साथ ही चारे की बर्बादी कम होती है.
यह भी पढ़ें – हजारों रुपये बचाएगा यह देसी नुस्खा, फसल के लिए नीम से बनाएं ऑर्गेनिक कीटनाशक


