Litchi Cultivation Tips: गर्मियों का सीजन आते ही मार्केट में जिस फल की सबसे ज्यादा डिमांड होती है वह है लीची. लेकिन लीची की खेती करने वाले किसानों के लिए असली चुनौती तब आती है जब पेड़ों में फल तो कम लगते ही हैं. तो इसके साथ ही उनकी क्वालिटी भी उतनी दमदार नहीं होती. अगर आप भी लीची की बागवानी से तगड़ा मुनाफा कमाना चाहते है. तो सही पोषण जरूरी है.
अक्सर हम महंगे केमिकल फर्टिलाइजर के पीछे भागते हैं. लेकिन जो कमाल देसी और ऑर्गेनिक खाद दिखा सकती है, उसका कोई मुकाबला नहीं. सही समय पर पेड़ों की जड़ों में सही डाइट देने से न सिर्फ पेड़ों की सेहत सुधरती है, बल्कि फलों का साइज और मिठास भी बढ़ जाती है. चलिए आपको बताते हैं उस खाद के बारे में जो आपकी लीची के बाग से मोटा मुनाफा निकालेगी.
ऐसे बढ़ाएं लीची का पौषण
लीची के पेड़ों के लिए सबसे बढ़िया देसी नुस्खा है. नीम की खली और सरसों की खली का मेल. नीम की खली जड़ों में लगने वाले कीड़ों और फंगस को खत्म करती है. जिससे पेड़ अंदर से मजबूत बनता है. वहीं सरसों की खली में फास्फोरस और नाइट्रोजन की भरपूर मात्रा होती है जो पेड़ों की ग्रोथ को रॉकेट की रफ्तार देती है.
इन दोनों को मिलाकर पेड़ों के चारों ओर रिंग बनाकर जड़ों में डालें. यह कॉम्बो न सिर्फ फलों की संख्या बढ़ाता है. बल्कि लीची के छिलके को फटने से भी रोकता है. जब फल चमकदार दिखेंगे, तो मंडी में आपको सबसे ऊंचा भाव मिलेगा.
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गोबर की खाद और वर्मी कंपोस्ट
सिर्फ खाद डाल देना काफी नहीं है. बल्कि उसका वेल-डीकंपोज्ड होना बहुत जरूरी है. कच्चा गोबर जड़ों में दीमक पैदा कर सकता है, इसलिए हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट का ही चुनाव करें. ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की जल धारण क्षमता (Water Retention) को बढ़ाती है.
जो लीची जैसी नमी पसंद फसल के लिए बहुत जरूरी है. हर साल मानसून के बाद या फूल आने से ठीक पहले पेड़ों की गुड़ाई करके यह खाद देने से मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है. इससे जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचती है और पेड़ को वह सारी एनर्जी मिलती है जिससे डालियां फलों के बोझ से लद जाती हैं.
सिंचाई में मिलाएं ये चीज
किसान अब वेस्ट डीकंपोजर जैसे लिक्विड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. जो पूरी तरह देसी है. गुड़, बेसन और गौमूत्र से तैयार यह घोल मिट्टी में सूक्ष्मजीवों (Microbes) की संख्या बढ़ा देता है. इसे सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर देने से पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंच जाते हैं. इसके साथ ही ध्यान रखें कि जब फल बनने शुरू हों तो नमी की कमी न होने दें.
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