Agro Processing For Farmers: आज के डिजिटल और आधुनिक दौर में पारंपरिक खेती के साथ-साथ बिजनेस माइंडसेट अपनाना बेहद जरूरी हो गया है. इसी सोच को हकीकत में बदलने का नाम है एग्रो प्रोसेसिंग, जो हमारे किसान भाइयों की किस्मत को पूरी तरह से बदल सकती है. असल में एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर एक ऐसा आधुनिक औद्योगिक ढांचा होता है जहां खेत से निकलने वाले कच्चे कृषि उत्पादों को सीधे फैक्ट्री या प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाया जाता है.
यहां एक ही जगह पर फल, सब्जी, डेयरी और अनाज की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. इस कमाल के सिस्टम का मकसद कृषि उत्पादों की बर्बादी को रोकना, ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना और सीधे बाजार तक पहुंच बनाना है. प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत सरकार भी इसके लिए बड़ा सपोर्ट दे रही है जिससे खेत से कंपनी तक का सफर बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके.
एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर की स्ट्रक्चर
एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर एक ऐसा स्मार्ट सेटअप है जहां कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन यानी मूल्य संवर्धन का काम एक ही छत के नीचे होता है. इसके स्ट्रक्चर की बात करें तो इसमें अचार, जैम, जूस, पनीर, आटा और बेसन बनाने वाली अलग-अलग एडवांस प्रोसेसिंग फैक्ट्रियां शामिल होती हैं. इसके साथ ही फसल को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज और बड़े वेयरहाउस बनाए जाते हैं जिससे किसानों का माल खराब न हो.
यह भी पढ़ें:अलर्ट हो जाएं गन्ना किसान, जून में फसल को रहता है सबसे ज्यादा इन बीमारियों का खतरा
इस क्लस्टर में उत्पादों की इंटरनेशनल लेवल की टेस्टिंग और आकर्षक पैकेजिंग करने के लिए खास यूनिट्स लगाई जाती हैं जो फसल की ब्रांडिंग में मदद करती हैं. इतना ही नहीं यहां माल को देश-विदेश के बाजारों में तेजी से भेजने के लिए शानदार ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था होती है और साथ में युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए कौशल विकास केंद्र भी बनाए जाते हैं.
किसानों को मिलने वाले बड़े फायदे
इस आधुनिक एग्रो प्रोसेसिंग मॉडल से हमारे किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए बिचौलियों या दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. किसान अपनी फसल को सीधे इन प्रोसेसिंग यूनिट्स में ले जाकर बेच सकते हैं जिससे उन्हें अपनी उपज का एकदम सही और फिक्स दाम मिलता है. फसल की प्रोसेसिंग होने से उसकी वैल्यू और कीमत मार्केट में काफी ज्यादा बढ़ जाती है जिससे किसानों की इनकम में बंपर इजाफा होता है.
युवाओं को मिलका है रोजगार
वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को अपने ही गांव के आसपास बेहतरीन रोजगार मिल जाता है और उन्हें शहरों की तरफ भागना नहीं पड़ता. नए उद्यमियों के लिए भी कम लागत में अपनी खुद की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का यह एक सुनहरा मौका होता है जिससे पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया बूस्ट मिलता है.
यह भी पढ़ें: बिना केमिकल लगाए भी पका सकते हैं आम, किसान जान लें देसी तरीका


