Friday, May 29, 2026
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अलर्ट हो जाएं गन्ना किसान, जून में फसल को रहता है सबसे ज्यादा इन बीमारियों का खतरा


Sugarcane Crop Safety Tips: गर्मियों के मौसम में जून का महीना आते ही गन्ने की खेती करने वाले किसान भाइयों की चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं. इस दौरान मौसम में आने वाला बदलाव और बढ़ता तापमान गन्ने की फसल के लिए कई तरह की बीमारियों और खतरनाक कीटों का न्योता लेकर आता है. कृषि वैज्ञानिकों और गन्ना विकास विभाग ने भी इस समय किसानों को अलर्ट रहने की सलाह दी है क्योंकि जरा सी भी लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. 

जून के इस तपने वाले महीने में गन्ने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान चूसक कीटों से पहुंचता है. जो चुपके से पौधों का रस चूसकर उन्हें अंदर से खोखला बना देते हैं. अगर समय रहते इन कीटों की पहचान और इनका सही इलाज न किया जाए तो गन्ने की ग्रोथ पूरी तरह रुक जाती है और चीनी की मात्रा भी घट जाती है. इसलिए इस मौसम में गन्ने की फसल की खास देखभाल और सही मॉनिटरिंग करना बेहद जरूरी हो जाता है. जान लीजिए बचाव के तरीके.

ब्लैक बग का बढ़ता हुआ आतंक

जून के गर्म और शुष्क मौसम में गन्ने की फसल पर ब्लैक बग यानी काला चिकटा कीट का हमला सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. यह कीट मुख्य रूप से पेड़ी गन्ने की फसल को अपना निशाना बनाता है और पत्तियों के बीच वाले हिस्से में जाकर छिप जाता है. इसके बाद इसके छोटे बच्चे और वयस्क कीट मिलकर गन्ने की पत्तियों का रस चूसना शुरू कर देते हैं. 

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रस चूसे जाने की वजह से पत्तियों पर कत्थई और पीले रंग के छोटे-छोटे धब्बे बनने लगते हैं और धीरे-धीरे पूरी पत्तियां सूखने लगती हैं. इस कीट के असर से पौधों में प्रकाश संश्लेषण यानी भोजन बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे गन्ने की लंबाई और मोटाई दोनों पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

फसल को बचाने के उपाय

ब्लैक बग के अलावा इस मौसम में थ्रिप्स नाम के छोटे चूसक कीट भी गन्ने की पत्तियों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. इनके हमले के कारण गन्ने की पत्तियां ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं और पौधों का रंग पीला पड़ने लगता है. इन दोनों ही खतरनाक चूसक कीटों से अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए किसानों को खेतों में हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे. 

इन बातों का भी रखें ध्यान

इसके साथ ही खेत के आसपास उगने वाले खरपतवारों को साफ रखना बहुत जरूरी है. रासायनिक बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों ने सुबह या शाम के समय प्रोफेनोफॉस + साइपरमेथ्रिन या फिर इमिडाक्लोप्रिड जैसी दवाओं का तय मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी है, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित और हेल्दी बनी रहती है.

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