Dragon Fruit Farming: आजकल ड्रैगन फ्रूट की खेती का क्रेज भारतीय किसानों के बीच बहुत तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि यह एक सुपरफूड है और मार्केट में इसके दाम भी बेहद शानदार मिलते हैं. वैसे तो ड्रैगन फ्रूट कैक्टस फैमिली का पौधा है, जो कम पानी और सामान्य गर्मी को बहुत आसानी से झेल लेता है, लेकिन जब गर्मियों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने लगता है. तो इसकी नाजुक टहनियां झुलसने लगती हैं.
तेज चिलचिलाती धूप और लूके कारण पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और उनके पीले होकर सूखने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे में अगर आप थोड़े से एडवांस और स्मार्ट तरीके अपनाएंगे, तो अपनी इस कीमती फसल को गर्मी के टॉर्चर से पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं चिलचिलाती धूप में भी पौधों को हरा-भरा रखने के 3 सबसे आसान और असरदार तरीके क्या हैं.
ग्रीन नेट और मल्चिंग तकनीक से पौधों को डबल प्रोटेक्शन
भीषण गर्मी के दिनों में ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सीधे सनबर्न से बचाने के लिए सबसे पहला और बेहतरीन उपाय है ग्रीन शेड नेट का इस्तेमाल करना. इसके लिए आप पौधों के ऊपर लगभग 50% डेंसिटी वाला ग्रीन नेट लगा सकते हैं, जो तेज और तीखी धूप को छानकर पौधों तक पहुंचाता है. जिससे उन्हें जरूरी रोशनी भी मिल जाती है और वे झुलसने से भी बच जाते हैं.
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इसके साथ ही पौधों की जड़ों में नमी को लंबे समय तक लॉक रखने के लिए मल्चिंग तकनीक अपनाना बेहद जरूरी है. आप पौधों के चारों तरफ सूखी घास, पुआल या गन्ने की सूखी पत्तियों की एक मोटी लेयर बिछा दें, जिससे मिट्टी की नमी धूप के कारण जल्दी भाप बनकर नहीं उड़ेगी और जड़ों के पास का तापमान एकदम मेंटेन रहेगा.
पानी देने का सही शेड्यूल
गर्मियों के सीजन में ड्रैगन फ्रूट की सिंचाई का तरीका और समय बदलना दूसरा सबसे बड़ा और जरूरी कदम है. इस मौसम में दोपहर के वक्त पानी देने की भूल बिल्कुल न करें, बल्कि हमेशा सुबह एकदम जल्दी या फिर शाम को सूरज ढलने के बाद ही हल्की सिंचाई करें जिससे जड़ों को ठंडी मिट्टी का अहसास मिले. पानी देते समय ध्यान रखें कि ड्रिप इरिगेशन या फव्वारा विधि सबसे बेस्ट होती है ताकि पानी की बर्बादी न हो और नमी बनी रहे.
न्यूट्रिशन से पौधों को बनाएं अंदर से मजबूत
इसके अलावा, चिलचिलाती धूप से लड़ने के लिए पौधों को अंदरूनी ताकत देना भी जरूरी है. जिसके लिए आप इस मौसम में हैवी केमिकल फर्टिलाइजर देने से बचें. इसके बजाय केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) या सीवीड लिक्विड एक्सट्रैक्ट जैसे ठंडे ऑर्गेनिक न्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल करें ताकि पौधे अंदर से स्ट्रॉन्ग रहें.
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