Black Rice Farming: आज के समय में पारंपरिक खेती के मुकाबले सुपरफूड्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. इस लिस्ट में सबसे ऊपर नाम आता है ब्लैक राइस यानी काले चावल का. इस चावल को आज भारत के किसान बड़े पैमाने पर उगा रहे हैं. आम धान के मुकाबले इसकी खेती से किसानों की कमाई कई गुना बढ़ गई है. आइए जानते हैं कि आखिर इस चावल में ऐसा क्या खास है जो यह बाजार में इतना महंगा बिकता है.
इस चावल में छुपा है लंबी उम्र का राज
काले चावल को प्राचीन काल में फॉरबिडन राइस कहा जाता था क्योंकि आम जनता को इसे खाने की इजाजत नहीं थी. इसका सबसे बड़ा कारण है इसकी बेमिसाल न्यूट्रिशनल वैल्यू. इस चावल का गहरा काला रंग एंथोसायनिन नाम के एंटीऑक्सीडेंट के कारण होता है. यह वही एंटीऑक्सीडेंट है जो ब्लूबेरी और जामुन में पाया जाता है. यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाता है, बुढ़ापे के लक्षणों को रोकता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. इसके इसी जादुई गुण की वजह से दुनिया भर के हेल्थ कॉन्शियस लोग इसे हाथों-हाथ खरीद रहे हैं.
साधारण चावल से 10 गुना ज्यादा दाम
बाजार में सामान्य सफेद चावल जहां 40 से 80 रुपये किलो बिकता है, वहीं ब्लैक राइस की कीमत 250 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति किलो तक होती है. ऑर्गेनिक ब्लैक राइस के दाम तो इससे भी ज्यादा हैं. इतनी ऊंची कीमत मिलने के कारण किसानों का प्रॉफिट मार्जिन बहुत बढ़ जाता है. हालांकि इसकी फसल को तैयार होने में आम धान से थोड़ा अधिक समय लगता है, लेकिन कम लागत और बंपर कीमत के कारण यह घाटे का सौदा बिल्कुल नहीं है. भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के बाद अब यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के किसान भी इसे उगाकर अपनी तकदीर बदल रहे हैं.
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क्या चावल खाने से भी कम हो सकता है वजन?
सफेद चावल खाने से अक्सर शुगर लेवल बढ़ने का डर रहता है, लेकिन ब्लैक राइस के साथ ऐसा नहीं है. इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है, जिसके कारण यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है. इसमें आयरन और प्रोटीन की मात्रा भी सफेद और ब्राउन राइस से कहीं अधिक होती है. यही वजह है कि जिम जाने वाले युवाओं से लेकर डॉक्टर्स तक, हर कोई इस महंगे चावल को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दे रहा है.
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