Tuesday, June 16, 2026
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सौंफ की खेती कैसे कर सकते हैं किसान, सरकार दे रही ट्रेनिंग


Fennel Farming Tips: रोज-रोज पारंपरिक फसलों के घाटे से परेशान किसानों के लिए कम लागत में बंपर मुनाफा कमाने का एक बेहतरीन मौका सामने आया है. किचन के मसालों से लेकर माउथ फ्रेशनर और आयुर्वेदिक दवाइयों तक, सौंफ की डिमांड मार्केट में पूरे 12 महीने हाई रहती है. इसी भारी डिमांड को देखते हुए और किसानों की इनकम को बढ़ाने के लिए अब सरकार आगे आई है और इसके लिए बाकायदा स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रही है.

आमतौर पर कुछ सीमित राज्यों में उगने वाली सौंफ अब देश के नए क्षेत्रों में उगाई जा रही है. इस नए तरीके को अपनाकर किसान अपनी खेती को एक प्रॉफिटेबल बिजनेस में बदल सकते हैं. जिसके लिए सरकार की इस फ्री ट्रेनिंग स्कीम का फायदा उठाकर सही और वैज्ञानिक तरीका सीखना बेहद जरूरी है.

सरकार की ट्रेनिंग के साथ शुरुआत

सौंफ की खेती को बड़े पैमाने पर प्रमोट करने के लिए सरकार किसानों को वैज्ञानिक तरीके से फार्मिंग करने के गुर सिखा रही है. नई जगहों पर इसका सफल ट्रायल होने के बाद अब वहां के लोकल किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के जरिए इस खेती से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सौंफ की खेती के लिए बलुई दोमट या चिकनी मिट्टी सबसे बेस्ट होती है. जिसमें जलभराव की समस्या न हो.

यह किस्म सबसे बेस्ट

फसल की अच्छी पैदावार के लिए राजेंद्र सौरभ जैसी उन्नत और हाइब्रिड किस्मों के बीजों का ही सिलेक्शन करना चाहिए. इस सरकारी ट्रेनिंग में किसानों को सही समय पर बुवाई, मिट्टी की तैयारी, नर्सरी मैनेजमेंट और बीज की सही मात्रा के बारे में पूरी जानकारी प्रैक्टिकल तरीके से दी जा रही है.

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कम लागत में बंपर मुनाफा 

इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लागत बहुत कम आती है और यह कम पानी में भी आसानी से सरवाइव कर जाती है. पौधे लगाने के बाद खेत में खरपतवार न उगे इसके लिए समय-समय पर हल्की निराई-गुड़ाई और हल्की सिंचाई की जरूरत होती है. अक्टूबर से नवंबर के बीच का समय इसकी बुवाई के लिए सबसे परफेक्ट और सटीक माना जाता है.

मार्केट में मिलते हैं अच्छे रेट

जब फसल पककर तैयार हो जाती है. तो इसके गुच्छों को तब काटा जाता है जब वे पूरी तरह से सूखकर हरे से हल्के पीले या भूरे होने लगें. मार्केट में अच्छी और प्रीमियम क्वालिटी की सौंफ के रेट हमेशा आसमान छूते हैं. इसलिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान अपनी नॉर्मल फसलों के मुकाबले कई गुना ज्यादा नेट प्रॉफिट आसानी से जेब में डाल सकते हैं.

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