Cashew Cultivation Tips : किसान अब ऐसी फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिनकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है और अच्छी कमाई की जा सकती है. ऐसी ही नकदी फसलों में काजू का नाम भी शामिल है. देश ही नहीं, विदेशों में भी भारतीय काजू की काफी मांग रहती है. यही वजह है कि काजू की खेती किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा ऑप्शन बनती जा रही है.काजू के पौधों को बहुत अधिक सिंचाई या लगातार देखभाल की जरूरत नहीं होती है.
यह कम पानी और कम उपजाऊ या पथरीली जमीन में भी अच्छी तरह बढ़ सकता है. इसी कारण इसे बंजर या ना यूज होने वाली जमीन का गोल्ड माइन भी कहा जाता है. अगर किसान सही किस्म का चयन करें, वैज्ञानिक तरीके से पौधे लगाएं और समय-समय पर जरूरी देखभाल करें तो कुछ ही सालों में काजू की खेती से लखपति बन सकते हैं. यही कारण है कि आज कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर काजू की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि अपने फार्म हाउस पर भी काजू की खेती कैसे कर सकते हैं.
भारत में काजू की खेती क्यों है जरूरी?
भारत में काजू की खेती देश की अर्थव्यवस्था में जरूरी योगदान देती है. भारतीय काजू अपनी क्वालिटी के कारण दुनियाभर में फेमस हैं. काजू को विदेशों में निर्यात करने से देश को करीब 4,000 करोड़ रुपये की कमाई होती है. इस खेती से लगभग 15 लाख लोगों को रोजगार मिलता है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है.
किन राज्यों में होती है काजू की खेती?
देश में सबसे ज्यादा काजू उत्पादन महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक और तमिलनाडु में होता है. ये पांचों राज्य मिलकर देश के कुल काजू उत्पादन का करीब 78 प्रतिशत हिस्सा देते हैं. साल 2022-23 में भारत में करीब 810 हजार टन काजू का उत्पादन हुआ, जबकि 2021-22 में यह 779 हजार टन था. देश में लगभग 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में काजू की खेती की जाती है.
यह भी पढ़ें – बारिश शुरू होते ही क्यों की जाती है धान की रोपाई, इससे पैदावार पर कितना फर्क पड़ता है?
काजू की खेती कैसे कर सकते हैं?
1. अगर आपके पास फार्म हाउस या खाली जमीन है, तो आप वहां भी काजू की खेती आसानी से शुरू कर सकते हैं. काजू की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली रेतीली या लेटराइट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. गर्म और नम जलवायु इसके लिए सही होती है.
2. इसकी खेती के लिए हमेशा प्रमाणित नर्सरी से स्वस्थ और उन्नत किस्म के काजू के पौधे खरीदें. बिजनेस खेती के लिए सॉफ्टवुड ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे बेहतर माने जाते हैं.
3. काजू के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय जून से अगस्त के बीच होता है. सामान्य खेती में पौधों के बीच 7-7 मीटर और हाई डेंसिटी खेती में 5-5 मीटर की दूरी रखें.
4. रोपाई के समय गड्ढों में 10-15 किलो गोबर की खाद मिलाएं. बारिश के बाद जरूरत के अनुसार फर्टिलाइजर दें. बेहतर उत्पादन के लिए ड्रिप सिंचाई अपनाना फायदेमंद माना जाता है.
5. पौधों की नियमित प्रूनिंग करें, जिससे धूप सभी पौधों तक पहुंचे. साथ ही कीट और रोगों से बचाव के लिए समय पर सही कंट्रोल उपाय अपनाएं.
6. काजू के पौधे तीसरे साल से फल देना शुरू कर देते हैं. मार्च से मई के बीच पके हुए फल और काजू की तुड़ाई करें. जैसे-जैसे पेड़ बड़ा होता है, उत्पादन बढ़ता जाता है और अच्छी इनकम मिलने लगती है.
काजू की खेती में कितना उत्पादन मिलता है?
काजू का पौधा 3 या 4 साल से फल देना शुरू कर देता है. इस समय एक पौधे से करीब 1 किलो काजू मिल सकता है. जैसे-जैसे पेड़ बड़ा और मजबूत होता है, उसका उत्पादन भी बढ़ने लगता है. 8 से 10 साल तक एक पेड़ से 10 किलो या उससे ज्यादा काजू मिलने की संभावना रहती है. अगर किसान अल्ट्रा हाई डेंसिटी तकनीक से काजू की खेती करते हैं, तो 4 साल से ही प्रति एकड़ करीब 5.5 लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है.
यह भी पढ़ें – सागवान की खेती से बनें करोड़पति, सरकार दे रही है पूरे 100% तक की भारी सब्सिडी


