Urea In Farming: खेती में यूरिया का काफी इस्तेमाल होता है. लेकिन सिर्फ यूरिया डाल देना ही अच्छी फसल की गारंटी नहीं होता. इसका सही समय और सही तरीका जानना भी उतना ही जरूरी है. कई किसान सुविधा के हिसाब से कभी तेज धूप में तो कभी बिना मौसम देखे यूरिया का छिड़काव या बिखराव कर देते हैं. इससे पौधों को पूरा फायदा नहीं मिल पाता और खाद का बड़ा हिस्सा हवा या पानी के साथ खराब हो जाता है.
नतीजा यह होता है कि खर्च बढ़ जाता है. लेकिन उत्पादन में वैसा फर्क नहीं दिखता. अगर यूरिया सही समय पर और सही नमी वाली मिट्टी में डाली जाए तो पौधे इसे बेहतर तरीके से अवशोषित करते हैं और फसल की बढ़वार भी तेज होती है. चलिए आपको बताते है कि सुबह, शाम या बारिश से पहले यूरिया डालने का सबसे सही समय कौन सा माना जाता है.
सुबह या शाम, कब डालें यूरिया?
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यूरिया डालने के लिए सुबह का समय या फिर शाम का समय सबसे बेहतर माना जाता है. इस दौरान तापमान थोड़ा कम रहता है और मिट्टी में मौजूद नमी के कारण नाइट्रोजन का नुकसान भी कम होता है. वहीं दोपहर की तेज धूप में यूरिया डालने से उसका कुछ हिस्सा अमोनिया गैस के रूप में उड़ सकता है.
जिससे पौधों तक पूरी मात्रा नहीं पहुंच पाती. अगर खेत में हल्की नमी हो या सिंचाई के तुरंत बाद मिट्टी नम हो,तो यूरिया का असर और बेहतर मिलता है. जहां मुमकिन हो यूरिया डालने के बाद हल्की सिंचाई करना भी फायदेमंद माना जाता है जिससे खाद जल्दी मिट्टी में मिल जाए और जड़ों तक पहुंच सके.
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बारिश से पहले डालें या बाद में?
अगर मौसम विभाग ने हल्की बारिश की संभावना जताई है. तो बारिश से ठीक पहले यूरिया डालना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि बारिश का पानी इसे मिट्टी में पहुंचाने का काम करता है. लेकिन तेज बारिश या लगातार बरसात की आशंका हो तो यूरिया डालने से बचना चाहिए. ऐसी स्थिति में खाद बहकर खेत से बाहर निकल सकती है और पौधों को पोषण नहीं मिल पाता.
इसी तरह जलभराव वाले खेतों में भी यूरिया डालना नुकसानदायक साबित हो सकता है. बेहतर यही है कि मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही खाद का इस्तेमाल करें. सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से डाली गई यूरिया न केवल फसल की बढ़वार बढ़ाती है बल्कि किसानों की लागत बचाने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में भी मदद करती है.
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