
खारे पानी की बात करें तो इसमें मुख्य रूप से वेनामेई प्रजाति के झींगे का पालन किया जाता है. इस झींगे की इंटरनेशनल मार्केट में जबरदस्त डिमांड है और इसे विदेशों में बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट किया जाता है. अगर आप तटीय इलाकों के पास रहते हैं या आपकी जमीन खारी है तो यह आपके लिए बेस्ट है.

खारे पानी में झींगे की ग्रोथ बहुत फास्ट होती है और आप साल में दो से तीन बार फसल ले सकते हैं. हालांकि इसमें रिस्क फैक्टर भी थोड़ा ज्यादा होता है क्योंकि खारे पानी में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसके बावजूद, भारी डिमांड के चलते इसका मार्केट रेट और प्रॉफिट मार्जिन दोनों बहुत तगड़े होते हैं.

दूसरी तरफ आता है मीठा पानी, जिसे हम नदियों, तालाबों या नहरों का पानी कहते हैं. मीठे पानी में आमतौर पर स्कैम्पी यानी मैक्रोब्रैकियम रोसेनवर्गी प्रजाति के झींगे को पाला जाता है. इसे आम बोलचाल में महाझिंगा भी कहते हैं क्योंकि इसका साइज खारे पानी वाले झींगे से काफी बड़ा होता है.

मीठे पानी में खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें बीमारियां लगने का चांस बहुत कम होता है. लोकल मार्केट में इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है. जिससे आपको इसे बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता. जो किसान रिस्क फ्री होकर काम करना चाहते हैं. उनके लिए यह बिल्कुल परफेक्ट है.

अगर दोनों के मुनाफे का गणित समझें तो खारे पानी का झींगा आपको कम समय में ज्यादा अमीर बना सकता है. बशर्ते आप हाई-टेक मैनेजमेंट और अच्छी फीडिंग का ध्यान रखें. वहीं मीठे पानी का झींगा आपको एक स्थिर और सुरक्षित इनकम देता है. जिसमें लागत और देखरेख का खर्च काफी कम आता है.

आखिर में फैसला आपकी लोकेशन, बजट और रिस्क लेने की क्षमता पर डिपेंड करता है. अगर आपके पास तटीय या खारी जमीन है और बजट अच्छा है तो खारे पानी की तरफ जाएं. लेकिन अगर आप कम बजट और ताजे पानी के साथ शुरुआत कर रहे हैं. तो मीठा पानी ही आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित होगा.
Published at : 18 Jul 2026 02:17 PM (IST)


