Bengal Chunav Result: माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा महज एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक दिशा में एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है। अइये जानते हैं यहां पर किस पार्टी को कितने मिले वोट…
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी… जिस जगह से 1967 में नक्सलवाद की चिंगारी भड़की थी और पूरे पश्चिम बंगाल में वामपंथी आंदोलन की नींव पड़ी, अब वह पूरी तरह से रंग बदल चुका है। एक समय जहां ‘लाल सलाम’ की गूंज होती थी, वहीं आज भगवा लहरा रहा है। नक्सलबाड़ी आंदोलन से शुरू हुई इस ऐतिहासिक भूमि पर आज भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो गया है। यही वह क्षेत्र है, जहां से वामपंथी लहर निकली और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने 1977 से 2011 तक लगातार 34 वर्षों तक पश्चिम बंगाल में सरकार चलाई। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी विधानसभा सीट पर बीजेपी का यह कब्जा महज एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक दिशा में एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है। एक तरह से कहा जा सकता है कि जहां एक दौर में नक्सलवाद और वामपंथ की जड़ें गहरी थीं, आज उसी क्षेत्र में बीजेपी-आरएसएस की विचारधारा का वर्चस्व स्थापित हो रहा है या यूं कहें तो हो गया है।
दरअसल, 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार आनंदमय बर्मन ने तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त दी। आनंदमय बर्मन को 1,66,905 वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस के शंकर मालाकर को मात्र 62,640 वोट प्राप्त हुए। बीजेपी ने 1,04,265 मतों के भारी अंतर से इस सीट पर कब्जा जमाया है। बता दें कि इस बार सीट पर कुल 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। कांग्रेस के अमिताव सरकार और सीपीआई (M) के झारेन राय सहित अन्य उम्मीदवारों में से सीपीआई(M) के झारेन राय तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें मात्र 8,585 मत मिले।
नक्सलबाड़ी का सियासी सफर
1967 में नक्सलबाड़ी के बेंगाईजोट गांव में कानू सान्याल के नेतृत्व में शुरू हुआ सशस्त्र किसान आंदोलन भारत के वामपंथी आंदोलन की नींव बना। चारु मजूमदार जैसे नेताओं ने इसे आगे बढ़ाया, जिससे सीपीआई (ML) का गठन हुआ और इसके बाद नक्सलवाद पूरे देश में फैला। जानकार बताते हैं कि इस आंदोलन की बदौलत सीपीएम ने पश्चिम बंगाल में 34 साल (1977-2011) तक लगातार सत्ता संभाली। यही कारण रहा कि माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी लंबे समय तक वामपंथ का मजबूत गढ़ रहा।
बदलते समय के साथ सत्ता परिवर्तन हुआ। 2011 में पहली बार ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ( TMC ) ने सत्ता पर कब्जा किया। 2011 में यहां से कांग्रेस के शंकर मालाकर विजयी रहे, लेकिन बीजेपी की वोट शेयर लगातार बढ़ती गई। 2011 में बीजेपी को सिर्फ 4.47 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2016 में 21 प्रतिशत से अधिक हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में आनंदमय बर्मन ने तृणमूल के राजेन सुंदरास को करीब 71 हजार वोटों से हराया था। 2026 में उन्होंने अपनी जीत को और मजबूत करते हुए रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल कर संदेश दे दिया कि अब यह झेत्र ‘लाल झंडे’ से मुक्त हो गया है और अब यहां सिर्फ भगवा ही भगवा लहराएगा।
उत्तर बंगाल में बीजेपी का बढ़ता दबदबा
बता दें कि पिछले एक दशक में आरएसएस और बीजेपी ने उत्तर बंगाल में लगातार संगठनात्मक काम किया। जमीन में उतरकर आम लोगों से खुद को जोड़ा। चाय बागान मजदूरों की बेहतरी, विकास कार्य, सीमा सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे स्थानीय मुद्दों पर फोकस कर संगठन के साथ-साथ पार्टी को मजबूती दी। बदलते सियासी समीकरण, वामपंथ के पतन और तृणमूल कांग्रेस पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच यहां के वोटर्स को विकल्प की तलाश थी, और विकल्प को बीजेपी ने भरपाई कर दी। आज उसी का नतीजा है कि प्रदेश में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है।


