Monday, August 10, 2026
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डॉक्टर बनने का सपना होगा आसान, गरीब MBBS छात्रों को मिलेगी 1.5 लाख की स्कॉलरशिप; जानें क्या है स्कीम, Career Hindi News


भारत में मेडिकल की पढ़ाई काफी महंगी मानी जाती है। कई बार टैलेंट और योग्य होने के बावजूद छात्र आर्थिक तंगी की वजह से एडमिशन नहीं ले पाते हैं और ऐसे में डॉक्टर बनने का सपना उनका अधूरा रह जाता है।

भारत में मेडिकल की पढ़ाई काफी महंगी मानी जाती है। कई बार टैलेंट और योग्य होने के बावजूद छात्र आर्थिक तंगी की वजह से एडमिशन नहीं ले पाते हैं और ऐसे में डॉक्टर बनने का सपना उनका अधूरा रह जाता है। ऐसे छात्रों की मदद के लिए आंध्र प्रदेश में एक नई पहल शुरू की गई है। फिनिक्स फाउंडेशन और डॉ. NTR यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (NTRUHS) ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को स्कॉलरशिप देने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए है। इस स्कॉलरशिप से योग्य छात्रों को पढ़ाई का खर्च उठाने में आर्थिक मदद मिलेगी। चलिए जानते हैं कि किन छात्रों को मिलेगा लाभ।

10 छात्रों को मिलेगा लाभ

इस योजना के तहत 2026-27 शैक्षणिक सत्र में 10 छात्रों का चयन किया जाएगा। इसके बाद हर साल नए लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। 2027-28 में 20, 2028-29 में 30 और 2029-30 में 40 छात्रों को स्कॉलरशिप दी जाएगी। वहीं, 2030-31 से हर साल 50 नए छात्रों को इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

कितनी मिलेगी राशि

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट क मुताबिक चयनित प्रत्येक छात्र को हर साल कम से कम 1.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। यह सहायता छात्र के MBBS कोर्स पूरा होने तक जारी रहेगी।

ट्यूशन फीस और हॉस्टल खर्च भी होगा कवर

स्कॉलरशिप के तहत जरूरत के अनुसार 100 प्रतिशत तक ट्यूशन फीस कवर की जाएगी। इसके अलावा, जहां जरूरत होगी, वहां हॉस्टल का खर्च भी इस सहायता में शामिल किया जाएगा। स्कॉलरशिप की राशि छात्र को सीधे देने के बजाय संबंधित शैक्षणिक संस्थान को ट्रांसफर की जाएगी। इससे छात्र की पढ़ाई से जुड़े खर्च को सीधे पूरा करने में मदद मिलेगी।

किसे मिलेगी स्कॉलरशिप?

इस स्कॉलरशिप के लिए 2026-27 शैक्षणिक सत्र से चयनित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS में दाखिला लेने वाले छात्र पात्र होंगे। आवेदन करने वाले छात्र के माता-पिता की सालाना आय 5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना मेधावी छात्रों को मेडिकल शिक्षा जारी रखने का अवसर देना है, ताकि पैसे की कमी उनके डॉक्टर बनने के सपने में बाधा न बने।

सिर्फ पैसे नहीं, मेंटरशिप भी मिलेगी

बता दें कि इस योजना के तहत छात्रों को केवल आर्थिक मदद ही नहीं दी जाएगी। उन्हें मेंटॉरशिप, पर्सनालिटी डेवलेपमेंट और प्रोफेशनल गाइडेंस भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ उनके भविष्य के करियर के लिए भी तैयार करना है।

गरीबी प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बाधा नहीं बननी चाहिए

बता दें कि इस स्कॉलरशिप योजना के लिए MoU पर हस्ताक्षर स्वास्थ्य मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव की मौजूदगी में हुए। उन्होंने कहा कि गरीबी कभी भी उन प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बाधा नहीं बननी चाहिए, जो डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम से लाभ पाने वाले छात्र आगे चलकर कुशल डॉक्टर बनेंगे और वंचित लोगों की सेवा करेंगे।

यह स्कॉलरशिप कार्यक्रम फिनिक्स फांउडेशन ने 2025 में दिवंगत चुक्कापल्ली शंकर राव की जन्म शताब्दी के अवसर पर शुरू किया था। इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को मेडिकल शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इस पहल से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS करने वाले ऐसे छात्रों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त नहीं है।



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