बिहार बोर्ड 15 अगस्त से 688 चयनित स्कूलों के 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए ‘इंटरैक्टिव लर्निंग’ एप शुरू कर रहा है, जिसके जरिए छात्र शिक्षकों के 10-सदस्यीय पैनल से सवाल पूछ सकेंगे।
BSEB Interactive Learning App: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने राज्य के स्कूली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और पढ़ाई को और अधिक सरल व रोचक बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है। बिहार बोर्ड अब राज्य के विद्यार्थियों के लिए ‘इंटरैक्टिव लर्निंग’ की आधुनिक डिजिटल सुविधा शुरू करने जा रहा है।
इस योजना की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से राज्य के चयनित 688 स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए की जाएगी। पहले चरण के सफल क्रियान्वयन के बाद इसे राज्य के सभी सरकारी और संबद्ध स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
क्या है बिहार बोर्ड का इंटरैक्टिव लर्निंग एप?
बिहार बोर्ड इस पूरी व्यवस्था को संचालित करने के लिए एक विशेष मोबाइल और वेब एप तैयार कर रहा है। चयनित 688 स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इस एप का इस्तेमाल करने के लिए अलग-अलग ‘लर्निंग आईडी’ दी जाएगी। छात्र अपने कंप्यूटर, मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप के माध्यम से आसानी से एप में लॉगिन करके पढ़ाई कर सकेंगे।
शुरुआत में यह सुविधा मुख्य विषयों—गणित, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी और अंग्रेजी के लिए उपलब्ध होगी। अगले चरण में अन्य विषयों को भी इसमें शामिल किया जाएगा और राज्य के अन्य स्कूलों के 9वीं से 12वीं के छात्रों को जोड़ा जाएगा।
स्क्रीन पर उपलब्ध रहेगा 10 शिक्षकों का पैनल
इस एप की सबसे बड़ी खासियत इसकी मेंटरशिप व्यवस्था है। जब छात्र एप के जरिए पढ़ाई करेंगे, तो उनकी स्क्रीन पर 10 विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का एक पैनल मौजूद रहेगा। विद्यार्थी किसी भी समय अपने मन में उठे सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत कर सकेंगे।
छात्र न केवल शिक्षकों से सवाल पूछ सकेंगे, बल्कि वे स्क्रीन पर शिक्षकों के विजुअल के साथ-साथ ब्लैक बोर्ड या व्हाइट बोर्ड को भी लाइव देख सकेंगे। यदि किसी विद्यार्थी को कोई विषय या टॉपिक किसी एक शिक्षक से समझने में कठिनाई होती है, तो वह एप की मदद से दूसरे शिक्षक से भी मार्गदर्शन ले सकता है।
‘APAAR ID’ से जोड़ा जाएगा छात्रों का डेटा
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम के अनुसार, इस सुविधा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर मेंटरशिप प्रदान करना है ताकि वे किसी भी समय अपने संदेह दूर कर सकें।
समिति के अधिकारियों ने बताया कि विद्यार्थियों की अपार (APAAR) आईडी और एनरोलमेंट नंबर को भी एप से जोड़ा जाएगा। इसकी मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि इंटरैक्टिव लर्निंग की सुविधा मिलने के बाद कितने विद्यार्थियों की समझ में सुधार हुआ और उनके परीक्षा परिणाम कितने बेहतर हुए।


