Thursday, February 26, 2026
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‘आप यहां आए किसलिए…’ सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा सवाल, सुखबीर बादल को राहत


हाइलाइट्स

पंजाब हाईकोर्ट के फैसले को मान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी.
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से सवाल किया कि जब FIR कंपनी ने दर्ज कराया था तो आप किसलिए आए हैं.

नई दिल्लीः शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को बड़ी राहत मिली. कोर्ट ने बादल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पंजाब सरकार की अपील को खारिज कर दिया. सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जहां राज्य सरकार को अपील करनी चाहिए थी?

जस्टिस अभय एस ओक की अध्यक्षता वाली बेंच ने पंजाब हाई कोर्ट के अगस्त 2023 के फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार की अपील पर सवाल उठाते हुए कहा कि IPC की धारा 270 (घातक कृत्य जो जीवन के लिए खतरनाक बीमारियों के फैलने का कारण बन सकते हैं) को दिखाने के लिए सबूत कहां हैं? या (धारा) 341 (गलत तरीके से रोकना) के तहत FIR को देखिए. इससे स्पष्ट है कि ऐसा कोई अपराध नहीं बनता है.

इसके अलावा उन्होंने कहा, ‘इस मामले मे सुखबीर बादल के खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू करने का कोई मामला ही नहीं बनता है. ऐसे में हम पंजाब हाई कोर्ट के फिर रद्द करने के फैसले में हस्तक्षेप करने में इच्छुक नहीं हैं.’ सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से सवाल पूछते हुए कहा जब यह मामला एक निजी खनन कंपनी की शिकायत के आधार पर शुरू किया गया था तो ऐसे मे राज्य हमारे सामने अपील करने क्यों आई है?

दरअसल, एक खनन कंपनी द्वारा जून 2021 में FIR दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बादल और शिरोमणि अकाली दल के अन्य सदस्यों ने कम्पनी के कर्मचारियों को धमकाया और अमृतसर जिले के वजीर भुल्लर गांव में खनन वाली साइटों में बाधा डाली और हस्तक्षेप किया.

'आप यहां आए किसलिए...' सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा सवाल, सुखबीर बादल को राहत

FIR में कहा गया है कि बादल और उनके समर्थकों ने मास्क नहीं पहना था. जबकि COVID-19 महामारी चल रही थी. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सुखबीर सिंह बादल पर दर्ज FIR को अगस्त 2023 में यह कहते हुए रद्द कर दिया कि FIR में दिए गए किसी भी अपराध की पुष्टि करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं है.

Tags: Sukhbir singh badal, Supreme Court



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