
इसके मुताबिक अरहर बोने के पैटर्न और टाइमिंग में मामूली सा बदलाव करके न सिर्फ सॉइल हेल्थ सुधारी जा सकती है. बल्कि प्रोडक्शन को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है. यह तकनीक उन किसानों के लिए मुनाफे वाली साबित हो रही है जो पुराने ढर्रे से हटकर कुछ नया और ज्यादा मुनाफे वाला करना चाहते हैं. आप भी जान लें पूरा तरीका.

अरहर की अच्छी फसल के लिए सबसे जरूरी है कि पौधों को पर्याप्त जगह मिले. इस नई तकनीक के तहत अरहर की बुवाई के लिए पौधों की दूरी और लाइनों के बीच के गैप पर विशेष ध्यान देना होता है. पहले किसान बीजों को काफी पास-पास बोते थे. जिससे पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषण नहीं मिल पाती थी. रिसर्च बताती है कि अगर अरहर को बेड प्लांटिंग या चौड़ी कतारों में लगाया जाए. तो पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है. वहीं जब पौधों को खुला वातावरण मिलता है तो उनकी बढ़वार भी अच्छी होती है और फलियां ज्यादा लगती हैं.
Published at : 09 Jun 2026 06:31 AM (IST)
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