Bamboo Farming Profit: ज्यादातर किसान खेती के नाम पर केवल परंपरागत खेती, सब्जियों कि खेती ही करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा था कि बांस जैसी फसल कि खेती करके किसान कम मेहनत के साथ-साथ ज्यादा कमाई भी कर सकते हैं. जी हां बांस की खेती, जिसे ज्यादातर लोग जगंल, झाड़ी समझ कर नजरअंदाज कर देता हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि बास की खेती को कई जगहों पर किसान हरा सोना कहते हैं, क्योंकि इसे एक बार लगाने के बाद कई सालों तक लगातार अच्छी कमाई होती रहती है.और सबसे खास बात है कि इसके खेती करने वाले किसानों को सरकार अच्छी सब्सिडी भी देती है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
बांस की खेती में कितनी होती है कमाई
बांस की फसल को लगाने के बाद कम से कम उसको अच्छी तरह तैयार होने में चार से पांच साल लग जाता है, जिसके बाद ही उसकी कटाई होती है. जिसके बाद ही ये फसल किसान को मुनाफा देना शुरु करती है. एक अनुमान के मुताबिक एक एकड़ जमीन से करीब 15 से 20 टन तक बांस की पैदावार हो सकती है, और बाजार में बांस का भाव 3,000 से 5,000 रुपए प्रति टन तक रहता है. उदाहरण के तौर पर देखें तो अगर कोई किसान 10 एकड़ में बांस की खेती करता है, तो पूरी फसल के जीवनकाल में उसे 60 से 80 लाख रुपए तक की कमाई हो सकती है.
इस उसल कि एक औऱ खास बात है कि बाकी फसलों की तरह इस खेती में पानी, खाद और कीटनाशक की जरूरत बाकियों के मुकाबले बहुत कम पड़ती है, और साथ जानवर भी इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते, जिससे किसाने का नुकसान भी नहीं होता और उनका खर्च भी बहुत कम होता है. इसके अलावा बांस कि खेती को हर मौसम बेहतर माना जैतै है.
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सरकार से कितनी मिलती है सब्सिडी और कैसे करें आवेदन
बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय बांस मिशन नाम की योजना चला रही है. जिसके तहत किसानों को बांस लगाने पर करीब 50 % तक सब्सिडी दे रही है, जो किसानों के सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. खास बात यह है कि सरकार की मदद सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पौधों की देखभाल और सुरक्षा के लिए अगले तीन साल तक अलग-अलग किस्तों में भी सहायता दी जाती है. योजना का लाभ लेने के लिए किसान को अपना आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर, खेत के कागजात, बैंक पासबुक और पहचान पत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों के साथ राष्ट्रीय बांस मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है.
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