Crop Fire Compensation: देश में के कई हिस्सों में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे खेतों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आने लगती है. इन घटनाओं में किसानों की खड़ी फसल कुछ मिनट में जलकर राख हो जाती है. जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है. ऐसी घटनाओं को लेकर अक्सर किसानों का सवाल यही रहता है कि अगर किसान ने फसल बीमा नहीं कराया है, तो क्या कोई फसल जलने पर उसे मदद मिल सकती है. दरअसल सरकार की व्यवस्था के अनुसार कुछ शर्तों के साथ किसानों को किसानों की फसल को नुकसान पहुंचने पर राहत जरूर मिलती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि खेत में आग लग जाए तो प्रति बीघा सरकार कितना मुआवजा देती है?
बिना बीमा के भी मिलती है आर्थिक मदद
अगर किसी किसान ने फसल बीमा योजना का लाभ नहीं लिया है. आगजनी जैसी घटनाओं के बाद राज्य सरकारी राहत देती है. कई मामलों में खेत में लगी आग को आपदा मानते हुए राज्य आपदा राहत कोष के तहत सहायता दी जाती है. हालांकि यह मदद पूरी तरह जांच और नियमों के पर आधारित होती है.
उत्तर प्रदेश में क्या है मुआवजे का प्रावधान?
खेत में आग लगने की घटनाओं को लेकर राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कई योजनाएं चलाती है. ऐसे ही उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री खेत खलिहान अग्निकांड सहायता योजना के तहत किसानों को जमीन के आधार पर मुआवजा दिया जाता है. उत्तर प्रदेश में 2.5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को करीब 15,000 रुपये, 2.5 से 5 एकड़ तक जमीन वाले किसानों को करीब 20,000 और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन वाले किसानों को करीब 30,000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है. नुकसान ज्यादा होने की स्थिति में कुछ मामलों में 1 लाख या उससे ज्यादा की सहायता भी दी जा सकती है. इसके अलावा सामान्य तौर पर फसल और नुकसान के आधार पर 6000 से 13,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता का प्रावधान है.
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किन फसलों पर मिलता है लाभ और क्या है मुआवजे की प्रक्रिया?
इस योजना में गेहूं, धान, मक्का, बाजरा, मूंग, मसूर और राई जैसी अनाज वाली फसलें शामिल है. इन फसलों को आग से नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाता है. हालांकि गन्ने की फसल को इसमें शामिल नहीं किया गया है. इसके अलावा किसान को आग लगने के कारण घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन को जानकारी देनी होती है. सबसे पहले लेखपाल या पटवारी को सूचना देनी होती है, इसके बाद ग्राम पंचायत या पंचायत सचिव को भी जानकारी देने के बाद तहसील स्तर पर जांच कराई जाती है. रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा तैयार होता है. किसानों को जन सुविधा केंद्र के जरिए ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर आवेदन भी करना होता है. इसके बाद मंडी समिति के माध्यम से सत्यापन और जांच की प्रक्रिया पूरी की जाती है. आमतौर पर 7 से 10 दिनों के अंदर सहायता राशि किसानों के खातों में भेज दी जाती है.
आवेदन के लिए जरूरी बातें
आग जैसी घटनाओं को लेकर 15 दिन के आवेदन करना जरूरी होता है. खेत और नुकसान के फोटो रखना भी जरूरी है. इसके साथ ही आधार से लिंक मोबाइल नंबर और बैंक खाता होना चाहिए. वहीं अगर किसान ने फसल बीमा कराया हो तो उसे ज्यादा और तय मुआवजा मिलता है और प्रक्रिया भी स्पष्ट होती है. बिना बीमा के राहत जरूर मिलती है, लेकिन यह सीमित और जांच पर निर्भर होती है.
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