Tuesday, July 21, 2026
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Farmers Irrigation Subsidy: बारिश नहीं हुई तो क्या हुआ? बुआई की तैयारी करें किसान, सरकार उठाएगी सिंचाई का खर्च


Farmers Irrigation Subsidy: देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ फसलों की बुआई का समय आ चुका है, लेकिन बारिश न होने के कारण कई राज्यों में बुआई प्रभावित हो रही है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों और सरकार ने किसानों को निराश न होने की सलाह दी है. सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बारिश की कमी के बावजूद किसान बुआई की तैयारी तेज करें. क्योंकि इस संकट की घड़ी में सिंचाई का अतिरिक्त खर्च सरकार उठाने जा रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर एक मजबूत आपातकालीन कार्ययोजना तैयार की है.

बुआई न रोकें किसान

मौसम विभाग की अनिश्चितता के बीच सरकार ने साफ किया है कि खेतों को सूखा नहीं छोड़ा जाएगा. जिन क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम हुई है, वहां सिंचाई के वैकल्पिक इंतजामों के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है. ऐसे में सरकार द्वारा बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में मानसून की देरी को देखते हुए, विशेष डीजल अनुदान योजना की घोषणा की जा रही है. इसके तहत किसानों को पंप सेट चलाकर सिंचाई करने के लिए प्रति लीटर डीजल पर भारी सब्सिडी दी जाएगी, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.

सिंचाई उपकरणों पर 90% तक सब्सिडी

कम पानी में अधिक पैदावार करने के लिए सरकार ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ अभियान को तेज कर रही है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इन आधुनिक सिंचाई तकनीकों को खरीदने के लिए छोटे और सीमांत किसानों को सरकार द्वारा 80 से 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है. 

यहां भी पढ़े: ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सेट पर मिल रही 55% सब्सिडी, कैसे आवेदन कर सकते हैं किसान

कम पानी वाली फसलें बोएं 

धान जैसी फसलों को काफी पानी की आवश्यकता होती है. ऐसे में किसान बाजरा, ज्वार और  रागी जैसी फसलें लगा सकते हैं. ये फसलें कम पानी और खराब मौसम में भी अच्छी पैदावार देती हैं.  यदि किसान धान ही उगाना चाहते हैं, तो वे कम दिनों में पककर तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन कर सकते हैं. साथ ही, धान की पारंपरिक रोपाई के बजाय डीएसआर (धान की सीधी बुआई) तकनीक का उपयोग करें, जिससे पानी की लगभग 20 से 30 प्रतिशत बचत होती है.

यहां भी पढ़े: Fennel Farming: पूरे साल रहती है सौंफ की डिमांड, किसान ऐसे शुरू करें इसकी खेती



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