Green Manure Kit Benefits : आज के समय में हर किसान की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उसकी जमीन की फर्टिलिटी कैसे बढ़े. लगातार रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी की ताकत धीरे-धीरे कम होती जा रही है. ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपकी जमीन फिर से पहले जैसी उपजाऊ बन जाए और फसल का उत्पादन बढ़े, तो आपको प्राकृतिक तरीकों की ओर ज्यादा ध्यान देना होगा.
इन्हीं तरीकों में से एक मिश्रित हरी खाद ( Green Manure kit) है, जो मिट्टी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. हरी खाद न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधारती है, बल्कि उसमें जरूरी पोषक तत्व भी बढ़ाती है. खास बात यह है कि इसे तैयार करना और इस्तेमाल करना बेहद आसान है. अब तो आप इसका बीज पैक घर बैठे ऑनलाइन भी मंगवा सकते हैं.
क्या है मिश्रित हरी खाद और क्यों है जरूरी?
मिश्रित हरी खाद कई तरह की हरी फसलों के बीजों का एक खास मिश्रण होता है. जब इन बीजों को खेत में बोया जाता है तो ये तेजी से बढ़ते हैं और मिट्टी में ऑर्गेनिक मैटर बढ़ाते हैं. इससे मिट्टी नरम, भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर बन जाती है. हरी खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ती है. पानी रोकने की क्षमता बेहतर होती है. केमिकल खादों की जरूरत कम हो जाती है और फसल की पैदावार में सुधार होता है.
कैसे करें इसका सही इस्तेमाल?
इस खाद को इस्तेमाल करने का तरीका बहुत आसान है. इसके लिए सबसे पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करें. इसके बाद मिश्रित हरी खाद के बीजों को पूरे खेत में समान रूप से बिखेर दें. जब पौधे अच्छी तरह बढ़ जाएं और उनमें फूल आने से ठीक पहले की अवस्था हो, तब इन्हें खेत में ही जोत दें. ऐसा करने से ये हरी फसल मिट्टी में सड़कर प्राकृतिक खाद में बदल जाती है, जो जमीन को बेहद उपजाऊ बना देती है.
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कितना बीज चाहिए और कहां से मिलेगा?
अगर आप अपने खेत के लिए यह तकनीक अपनाना चाहते हैं, तो लगभग 3.30 किलो का मिश्रित बीज पैक काफी रहता है. वहीं इसे खरीदने के लिए अब आपको बाजार जाने की जरूरत नहीं आप इसे आसानी से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं और घर बैठे मंगवा सकते हैं.
कैसे बन जाएगी आपकी मिट्टी ‘सोना’?
जब आप इस हरी खाद को सही समय पर खेत में मिलाते हैं, तो यह मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाती है और सूक्ष्म जीवों की संख्या को भी बढ़ावा देती है. इससे जमीन की प्राकृतिक ताकत लौट आती है और आपकी फसल पहले से ज्यादा स्वस्थ और भरपूर होती है. इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपकी जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहे और आपको बेहतर उत्पादन मिले, तो इस प्राकृतिक तरीके को जरूर अपनाएं.
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