MSP News For Farmers: मोदी कैबिनेट ने किसानों की झोली खुशियों से भर दी है और खेती-किसानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP के जरिए किसानों की आय सुरक्षित करने के लिए 2.60 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है. इससे देश के करोड़ों अन्नदाताओं के पसीने की सही कीमत मिलने की गारंटी है.
आज के दौर में जहां लागत बढ़ रही है. सरकार का यह मास्टरस्ट्रोक किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लाया गया है. इस बड़े निवेश से न केवल फसलों की सरकारी खरीद तेज होगी. बल्कि खेती अब घाटे का सौदा नहीं बल्कि एक मुनाफे वाला बिजनेस बनकर उभरेगी. जान लीजिए अपने काम की बात.
MSP के लिए 2.60 लाख करोड़ की मंजूरी
कैबिनेट ने पीएम-आशा (PM-AASHA) योजना को और भी ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए इसे 2.60 लाख करोड़ रुपये के साथ जारी रखने की मंजूरी दी है. इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर बाजार में फसलों की कीमत MSP से नीचे गिरती है, तो सरकार हस्तक्षेप करे और किसानों को उनका हक दिलाए.
इस बजट का एक बड़ा हिस्सा दालों, तिलहन और तेल वाले बीजों की खरीद पर खर्च किया जाएगा. खास बात यह है कि सरकार ने अब खरीद की सीमा को भी लचीला बनाया है. जिससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके और उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों पर बिचौलियों को न बेचनी पड़े.
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दालों और तिलहन के उत्पादन पर फोकस
भारत को दलहन और तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं. सरकार का टारगेट है कि 2027-28 तक देश दालों के उत्पादन में पूरी तरह सेल्फ-डिपेंडेंट बन जाए. इसके लिए ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ के तहत अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की खरीद को अब वास्तविक उत्पादन के 100% तक बढ़ा दिया गया है.
यानी किसान जितना पैदा करेंगे. सरकार उसे MSP पर खरीदने के लिए तैयार रहेगी. इससे किसानों में इन फसलों को उगाने का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और विदेशी आयात पर हमारी निर्भरता कम होगी. यह कदम खेती में विविधता लाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार
2.60 लाख करोड़ रुपये का यह निवेश सीधे ग्रामीण भारत की नसों में खून की तरह काम करेगा. जब किसान की जेब में पैसा आएगा, तो ग्रामीण बाजारों में डिमांड बढ़ेगी, जिससे ट्रैक्टर, खाद, बीज और अन्य एग्री-इक्विपमेंट्स की बिक्री में उछाल आएगा.
इसके अलावा सरकार ने ई-नाम (e-NAM) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आधुनिक वेयरहाउसेस के नेटवर्क को भी इस बजट से मजबूती देने की योजना बनाई है. इससे फसल की बर्बादी कम होगी और किसानों को अपनी उपज स्टोर करके सही समय पर बेचने की आजादी मिलेगी.
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