Monday, April 27, 2026
Google search engine
Homeकृषि समाचारPercentage of Carbon in Soil: खेती के लिए मिट्टी में कितना होना...

Percentage of Carbon in Soil: खेती के लिए मिट्टी में कितना होना चाहिए कार्बन, किसान जान लें काम की बात


Percentage of Carbon in Soil: भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां की लगभग आधी आबादी खेती-किसानी से जुड़ी हुई है. ऐसे में खेती के लिए सही संसाधन और जानकारी होना बेहद जरूरी होता है. बिना सही जानकारी के खेती करना कभी-कभी नुकसानदेह हो सकता है. आज के समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ पानी या खाद नहीं, बल्कि मिट्टी की गिरती सेहत है.

मिट्टी की गुणवत्ता का सबसे अहम पैमाना सॉयल ऑर्गेनिक कार्बन (SOC) है, यानी मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन. यही कार्बन मिट्टी को उपजाऊ बनाता है और फसल की अच्छी पैदावार की नींव तैयार करता है. यह मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, पानी को रोककर रखता है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराता है.

मिट्टी में कितना कार्बन होना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ उपजाऊ मिट्टी में कार्बन की मात्रा लगभग 1 से 3 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए. अगर यह 0.5 प्रतिशत से नीचे चला जाए तो मिट्टी कमजोर मानी जाती है और फसल की उत्पादकता पर सीधा असर पड़ता है. चिंता की बात यह है कि भारत के कई हिस्सों में मिट्टी का कार्बन स्तर घटकर 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो लंबे समय में खेती के लिए खतरे का संकेत है.

बहुत जरूरी होता है कार्बन

मिट्टी में कार्बन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. यह मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे जड़ों का विकास बेहतर होता है. साथ ही, यह पानी को लंबे समय तक रोककर रखता है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है. कार्बन मिट्टी में मौजूद माइक्रो ऑर्गेनिज्म के लिए भोजन का काम करता है, जो पोषक तत्वों को पौधों तक पहुंचाने में मदद करते हैं. यही कारण है कि ज्यादा कार्बन वाली मिट्टी में फसलें अधिक स्वस्थ और उत्पादक होती हैं.

यह भी पढ़ें – खेती-किसानी के साथ गांव में शुरू करना चाहते हैं रोजगार, इस योजना में भारी सब्सिडी देती है सरकार

किसानों के लिए 5 काम की बातें

  • अगर आपके खेत की मिट्टी में 1 प्रतिशत से कम कार्बन है तो पहले इसे 1 प्रतिशत तक लाने पर ध्यान दें, यही सबसे जरूरी काम है.
  • हर साल जैविक खाद डालें, सिर्फ रासायनिक खाद पर निर्भर न रहें, वरना मिट्टी कमजोर होती जाएगी.
  • पराली जलाना बंद करें, यह बहुत नुकसान पहुंचाती है क्योंकि इससे मिट्टी का कार्बन तेजी से खत्म होता है.
  • बार-बार जुताई करने से मिट्टी का कार्बन हवा में उड़ जाता है, इसलिए कम जुताई करना बेहतर रहता है.
  • हर 2 से 3 साल में मिट्टी की जांच कराएं, ताकि आपको सही जानकारी मिले कि कार्बन कितना है और क्या सुधार करना है.

यह भी पढ़ें – 1 एकड़ में कितनी जैविक खाद डालनी चाहिए, फसल बुवाई से पहले किसान जान लें काम की बात



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments