Saturday, July 25, 2026
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Success Story: 11 साल की उम्र में हुई शादी, गरीबी से लड़ी जंग; 5वीं प्रयास में निकाला NEET, Career Hindi News


रामलाल भोई एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं। उनका परिवार चित्तौड़गढ़ के घोसुंडा गांव में बेड़च नदी के किनारे बने एक कच्चे मकान में रहता है। घर में बिजली की सुविधा भी नियमित नहीं है और पानी की भी काफी परेशानी रहती है

एक मशहूर शेर है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस शेर पर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के घोसुंडा गांव में रहने वाले रामलाल की कहानी बिल्कुल फिट बैठती है। छात्र रामलाल ने नीट जैसी कठिन परीक्षा को पास कर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किस्मत भी बदली जा सकती है। यह बात है साल 2023 की जब रामलाल ने कई प्रयासों के बाद नीट में सफलता हासिल की थी। हालांकि यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।

उनकी लाइफ की जद्दोजहद तब शुरू होती है, जब उनका 11 साल की उम्र में विवाह करा दिया जाता है। बाल विवाह अक्सर बच्चों के सपनों और भविष्य पर रोक लगा देता है, लेकिन कुछ लोग अपनी मेहनत और हिम्मत से इन मुश्किलों को पीछे छोड़ देते हैं। लेकिन रामलाल भोई ने अपने सपनों के आगे समझौता नहीं किया। चलिए इनकी कहानी जानते हैं।

कौन है रामलाल भोई

रामलाल भोई एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं। उनका परिवार चित्तौड़गढ़ के घोसुंडा गांव में बेड़च नदी के किनारे बने एक कच्चे मकान में रहता है। घर में बिजली की सुविधा भी नियमित नहीं है और पानी की भी काफी परेशानी रहती है। उनके पिता खेतों में मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी मां पशुओं का चारा बेचकर घर चलाने में मदद करती हैं। रामलाल अपने पांच भाई-बहनों में से एक हैं। आर्थिक तंगी और कई कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और अपनी मेहनत के दम पर सफलता हासिल की।

11 साल में हुआ बाल विवाह

रामलाल ने कोटा में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी की और अपनी मेहनत के दम पर सफलता हासिल की। उनका बचपन संघर्षों से भरा रहा। जब वह सिर्फ 11 साल के थे और छठी कक्षा में पढ़ते थे, तभी उनका बाल विवाह कर दिया गया। हालांकि, इस घटना ने उनके पढ़ाई के सपने को कमजोर नहीं होने दिया।

समाज की रूढ़िवादी सोच के कारण रामलाल के लिए पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। उनके पिता भी नहीं चाहते थे कि वह 10वीं कक्षा के बाद आगे पढ़ाई करें। एक समय ऐसा भी आया जब दूसरों की बातों में आकर उनके पिता ने उन्हें डांटा-फटकारा और पढ़ाई छोड़ने के लिए कहा। लेकिन रामलाल अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। उन्होंने हार नहीं मानी और डॉक्टर बनने का सपना जिंदा रखा।

नीट क्या होता है ये नहीं था पता

एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट में रामलाल के हवाले से बताया गया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उन्होंने अपने गांव के सरकारी स्कूल से 10वीं कक्षा 74 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। इसके बाद वह 11वीं कक्षा में कृषि (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई करने के लिए उदयपुर गए। उदयपुर में पढ़ाई के दौरान उनके शिक्षकों ने उन्हें पहली बार बायोलॉजी विषय और NEET परीक्षा के बारे में जानकारी दी। इससे पहले उन्हें यह भी नहीं पता था कि डॉक्टर बनने के लिए NEET परीक्षा पास करना जरूरी होता है। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया और पूरी लगन से तैयारी शुरू कर दी।

इसके बाद रामलाल ने बायोलॉजी विषय से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान वह सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा संचालित निशुल्क अंबेडकर छात्रावास में रहकर पढ़ाई करते थे, जिससे आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी शिक्षा जारी रह सकी।

कई बार मिली असफलता

रामलाल ने साल 2019 में उन्होंने 12वीं कक्षा 81 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। रामलाल ने शुरुआती वर्षों में बिना किसी कोचिंग के स्वयं पढ़ाई (Self Study) कर NEET की तैयारी की। उन्होंने 2019 में 350 अंक, 2020 में 320 अंक और 2021 में 362 अंक हासिल किए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद उनके शिक्षकों ने सलाह दी कि बेहतर तैयारी के लिए उन्हें कोटा जाकर कोचिंग करनी चाहिए। बेटे के सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कोटा भेजा। वहां पढ़ाई करने के बाद उनकी तैयारी और मजबूत हुई। NEET 2022 में उन्होंने 490 अंक हासिल किए और आखिरकार 2023 में अपने पांचवें प्रयास में NEET परीक्षा पास कर ली।



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