Sunday, July 26, 2026
Google search engine
HomeएजुकेशनTET पास शिक्षामित्रों का मामला, सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को नोटिस;...

TET पास शिक्षामित्रों का मामला, सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को नोटिस; 27 अगस्त को सुनवाई, Career Hindi News


सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार जिन व्यक्तियों ने टीईटी उत्तीर्ण कर ली थी, उन्हें सेवा में बनाए रखा जाना था और केवल ऐसे शिक्षामित्रों को हटाया जाना था जिन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं की थी। पीठ ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

टीईटी पास शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। जुलाई 2017 में उन शिक्षकों का समायोजन भी रद्द हो गया था जिन्होंने पूर्व में टीईटी पास कर रखी थी। इसके खिलाफ शिक्षमित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की थीं। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 29 जनवरी 2026 को यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था कि इस प्रकरण में निर्णय हो चुका है। इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) दायर की थीं।

इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने 13 जुलाई 2026 को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के आदेश से इसलिए प्रभावित हैं क्योंकि उन्हें उन व्यक्तियों के समान मान लिया गया है, जिनके विरुद्ध सेवा से अलग करने का निर्देश दिया गया था।

याचिकाकर्ता पास है टीईट

हालांकि याचिकाकर्ता स्वयं टीईटी उत्तीर्ण हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार जिन व्यक्तियों ने टीईटी उत्तीर्ण कर ली थी, उन्हें सेवा में बनाए रखा जाना था और केवल ऐसे शिक्षामित्रों को हटाया जाना था जिन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं की थी। पीठ ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले को 27 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

टीईटी की अनिवार्यता का विरोध

वहीं, जौनपुर में उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने बुधवार शाम को राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी से मुलाकात की। शिक्षकों ने उन्हें टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में ज्ञापन सौंपा।

शिक्षकों की मांग

पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। मंडल अध्यक्ष डॉ. संतोष तिवारी ने सांसद को बताया कि न्यायालय द्वारा 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता दी गई है।

मानसिक तनाव की समस्या

जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय ने कहाकि अध्यापक 25 वर्ष से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन अध्यापकों के सम्मान, आजीविका और भविष्य पर दांव खड़ा हो गया है। प्राथमिक संघ के अमित सिंह ने कहा कि नौकरी जाने की आशंका से शिक्षक और उनके परिवार के लिए मानसिक तनाव पैदा हो गया है।

सांसद का आश्वासन

संगठन ने सांसद से कहा कि इस विषय पर अध्यादेश अथवा संसद से संशोधन करके बिल पारित होना चाहिए जिससे शिक्षक सुकून के साथ अपनी सेवाएं दे सकें। सांसद ने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को संसद उठाएंगी। इस मौके पर मनीष सिंह, राजीव सिंह लोहिया, जितेंद्र उपाध्याय, मृत्युंजयसिंह, अजय पांडेय, राजेश यादव, प्रदीप श्रीवास्तव, प्रवीणसिंह, राकेश उपाध्याय, मुकेश श्रीवास्तव, संतोष सिंह, रामसिंह, राजू सिंह, चतुर्भुज, सुरेश यादव, मंद्रीका मौर्य आदि उपस्थित रही।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments